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मौन साधना दर्शन लेख

 कहते हैं कि मौन में बहुत शक्ति है मौन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं। क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक ​​जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है. कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मौन साधना क्यों करनी चाहिए। कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध...

मौन साधना दर्शन लेख


 कहते हैं कि मौन में बहुत शक्ति है मौन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं।

क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक ​​जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है.

कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मौन साधना क्यों करनी चाहिए।

कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध का विषय है, अब प्रश्न है कि हम मन को कैसे पहचानते हैं, मन को कैसे पहचानें, तब मेरे विवेक से हमें एकांत में अपने विचारों को अलग-अलग भाव से पढ़ना चाहिए। हजारों विचार जो पल-पल पर बदल रहे हैं अब हमें पढ़ना है और अपने आप को गहराई से जोड़ना है और आपने महसूस किया है कि हमारे अंदर के विचार कि भीड़ ऐसे है कि हम कितने अकेले हैं। ऐसे में हम अपने सुझाव देते हैं कि भीड़ में से कितना अलग हो तब हमें अपनी आत्मा के अंदर खोदना होगा हमें यह विचार करना चाहिए कि इस धरती पर हम क्यों आए हैं हमारा काम है और हम अपनी धरती पर सिर्फ विलास के लिए ही आते हैं जब हम इस दुनिया में नहीं आते हैं। अपनी आत्मा से यह प्रश्न पूछेंगे तब हमारी आत्मा हमें उत्तर से कटी हुई अलग-अलग में उलझाकर परे हट जाएगी।

दर्शन है कि आत्म बोध के लिए हमें अपने विचारों को खाली करना होगा मतलब हमें अपनी स्मृति खोना होगा लेकिन यह कैसे प्रश्न है।

मौन साधना सबसे बड़ी साधना है जिसमें हम गहरी साधना करते हैं, केवल दर्शन को बताते हैं, जो हमारे काम के बारे में बताते हैं, उन्हें हटाते नहीं हैं, इसके लिए हमें निरंतर आत्मा से संवाद करना होगा। हमारे लिए कुछ समय के लिए ब्रह्मांड को देखना होगा जैसे कि पल पल ब्रह्मांड बड़े जा रहे हैं, लेकिन अपनी-अपनी सीमा में हमारे घर के तारें चांद सूरज से जुड़े हुए हैं, हमें अथाह सागर देखने की जरूरत है। हमारे विचार हमें आत्मबोध नहीं करा सकते हैं, हमें निरंतर एकांत में रहकर अपने विचारों को तटस्थ भाव से पढ़ाना चाहिए और आत्मा से संवाद करना चाहिए हमें जीवन जीने का कारण मूल समझ में लाना चाहिए। हमारी आत्मा से परमात्मा की ओर जानें लगता है ।

मिस्टर कि बहुत बड़े डाक्टर थे मनोचिकित्सक थे दूर दूर तक उनका नाम था अवसाद ग्रस्त मरीजों कि लाईन लगी रहती थी फीस भी अच्छी खासी थी ऐसे में स्वाभाविक है पैसा अच्छा आता था लेकिन हजारों मरीजों को अवसाद से बचाकर खुद अवसाद ग्रस्त था यह अन्दर कि बात थी ऐक दिन मेरी मिस्टर आ से मुलाकात हुई हालचाल पूछने के बाद उन्होंने कहां अंदर कि बात है देखिए किसीको पता नहीं चलना चाहिए मैंने कहा नहीं पता चलेगा आप बताइए तब उन्होंने कहा कि मैं खुद अवसाद में चला गया हूं मैंने कहा कैसे तब उन्होंने कहा कि मुझे डर है कि कहीं मेरी प्यारी पत्नी मुझे तलाक न दें दें मैंने कहा ऐसा क्यों आप शहर के नामी-गिरामी डाक्टर है और आप ने अवसाद ग्रस्त लोगों का ठेका ले लिया है आप के पास पैसा भी बहुत हैं फिर तलाक़ समझ में नहीं आ रहा है तब उन्होंने फुसफुसाते हुए कान में कहा कि मेरी प्यारी पत्नी का चक्कर ड्राइवर के साथ है और मैंने उन दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया है ठीक है लेकिन अगर वह तलाक देती है तब समाज में बड़ी बदनामी होगी किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगा गलती मेरी है कि में पैसा कमाने में इतना व्यस्त हो गया था कि प्यारी पत्नी को समय भी नहीं दे पाया अब क्या करें समझ में नहीं आता तब मैंने कहा अपना मुंह आंखों को बंद रखिए एकांत में बैठकर अपने विचारो को पढ़िए भूल जाइए कि आप ने कुछ देखा था भूल जाइए कि आप कि पत्नी का चक्कर ड्राइवर के साथ चल रहा है जैसा कि आप ने खुद कबूल किया है कि पैसा कमाने में आप ने पत्नी को समय नहीं दिया अब आप एकांत में मोन रहकर अपने विचारो को डीलेट किजिए अपनी आत्मा से संबाद किजिए फिर देखना आप अवसाद से मुक्त हो जाओगे आप को असीम शांति मिलेगी कुछ समय बाद मिस्टर आ मेरे पास आकर कान में फुसफुसाते हुए मेरी प्यारी पत्नी का ड्राइवर से अफेयर खत्म हो गया है और हम बहुत खुश हैं सच कहूं मैं बहुत बड़ा अपने आप को मनोचिकित्सक समझता था लेकिन नहीं सबसे बड़ा चिकित्सा हमारा मन है हमारे विचार हैं हमारी पॉजिटिव ऊर्जा है जो हमें एकांत में बैठकर आत्म संबाद से मिलती है।

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