भादों मास की अंधेरी रात थी आसमान में काली घटाएं छाई हुई थी कभी कभी जोरदार बिजली दूर कहीं चमक रही थी हालांकि रिमझिम रिमझिम बारिश हो रही थी मकान के बाहर पीपल के पेड़ कि टहनियां हबा में कुछ संगीत गुनगुना रही थी और मुहल्ले का कालू कुत्ता बीच-बीच में भोंक कर अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहा था मानो वह कह रहा हों में हूं ना आप लोग निश्चित होकर आराम किजिए में हूं ना आप लोग स्वप्न के संसार में विचरण किजिए ऐसे ही मौसम में कुंवारी मुग्धा विस्तर पर करवटें बदल रही थी शायद कुछ परेशान थी तभी तो वह अपने उभरे हुए पेट पर हाथ फेर रही थी कभी कभी वह मुस्कुरा कर कुछ कोई लोरी गुनगुनाने लगती तब कभी कुछ और सोचतीं एकाएक उन्होंने मोबाइल पर कोई नम्बर डायल किया था जो शायद नहीं लग रहा था मुग्धा ने तीन चार बार नंबर को डायल किया था नहीं लगने के बाद उसने व्हाट्सएप पर मैसेज छोडा था सुनो आप पापा बन गए आप खुश हैं ना ?? मैसेज भेजने के बाद वह खुश होकर नींद के आगोश में चली गयी थी चूंकि वह उच्च शिक्षित मल्टीनेशनल कंपनी में एच आर मैनेजर पद पर कार्यरत थी तनख्वाह भी ठीक ठाक थी सहकर्मी यो में मान सम्मान भी अच्छा था मेहनती और काम ...
सुबह विमला पति के लिए नाश्ता के साथ लंचबॉक्स तैयार कर रहीं थीं साथ ही ख्यालों में खोई हुई थी पता नहीं कि भैया भाभी रक्षाबंधन पर बुलाते हैं या नहीं पहले तो अम्मा थी जो सभी तीज त्यौहार पर बुला लिया करतीं थीं पर उनके गुजर जाने के साथ ऐसा लगता है कि जैसे मायके से रिश्ता हमेशा के लिए ही टूट गया था पर हां कभी कभी भैया का फोन जरूर हाल चाल जानने के लिए आ जाता था परन्तु भाभीजी तो कभी भी फोन लगाना ही उचित नहीं समझती किसी ने सच ही कहा था कि जब तक माता पिता जीवित रहते हैं तब तक मायका के दरवाजे खुले रहते हैं पर उनके जाने के बाद मायका नाम मात्र सिर्फ फोन पर हाल चाल जानने तक ही सिमट जाता है यहीं सब कुछ तो हुआ था बिमला के साथ कैसा सुखी परिवार था पापा कि लाडली थी वह और मां कि राज दुलारी बढ़े भाई कि प्यारी सी गुड़िया प्यारी सी बहना और भाभीजी के लिए उसकि सबसे अच्छी सहेली जो कि उससे सब कुछ अच्छा बुरा भैया कि डांट डपट मां का समझाना गुस्सा होना सब कुछ शेयर कर अपना मन हल्का कर लेती थी हालांकि उसके व्याह को पांच साल हों गये थें पर पिछली सुखद ताज़ी स्मृति याद आते ही लग रहा था कि जै...