आत्मा ने मुझसे कहां तुझे परमात्मा ने क्यों भेजा पता है तुझे तुने कितने कितने वादे किए ?? मे तुनक कर बोला हा मुझे मालूम है ऊस समय मां के पेट मे था । पेशाब मे लथपथ था गर्भ गृह मे थे बहुत सारे कीड़े जो थें अल बेले बिन नख दंत के काटते थें बहुत दर्द होता था पर किसी से कह नहीं सकता था ? मज़बूरी थी मुक्ति चाहिए थी इसलिए कर दिए होगे वादे अजब गजब निराले परमात्मा को सारे पर अब तो मे मजबूर नहीं कोई जेल गृभगृह जैसी नही ? न ही काटते है टिंडे न ही पडा हूँ पेशाब टट्टी पर में आजाद हूं उड़ता हूं मस्त गगन मे पंछी कि तरह घूमता हूं हवाई जहाज पर जाता हू यूरोप अमेरिका पाकिस्तान बंगाल देश और आस्ट्रेलिया इंग्लैंड करता हू डांस जवान मधुबाला से मधुशाला पहुंच कर पिता हूं वियर और शराब फिर पहुंच जाता है मस्तिष्क सात समुद्र पार सात लोक चांद मंगल गृह पर जहां मुझे खोजना है नया बसेरा करूगां खेती-बाड़ी उगाएं गा अनाज जो भरेगा पेट लगाऊंगा बाग फल...
अपनी सी कहानियां का पिटारा