Skip to main content

Posts

Showing posts with the label परिवार

प्रेम विवाह और समाज

सुबह का समय था जाड़ों के दिन थे कोहरा छाया हुआ था वातावरण में शीतलहर चल रही थी जिससे हड्डियां पी कंपकंपा रहीं थीं ऐसे में अधिकांश लोग गांव में गाय भैंस कि सेबा कर दुध निकालकर भूसा खली डाल कर या तो विस्तर में रजाई में दुबके हुए थे या फिर अलाव जलाकर अपने शरीर को गर्म रख रहे थे कुछ लोग चाय के साथ गरमागरम मूंग दाल की चटपटे खा कर ठंडी का जश्न मना रहे थे कुल मिलाकर यह कोहरे के कुछ दिन किसानों को जी तोड़ मेहनत करने से छुटकारा दिला रहे थे गंगा राम बरामदे में अलाव जलाकर हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे सहसा उन्होंने बड़े बेटे घना राम को आवाज देकर कहा जरा मोबाइल फोन तो लाना देखो तो चेना राम कितना लापरवाह हो गया है एक हफ्ते से कोई खैर खबर ही नहीं दी अभी बच्चू कि ख़बर लेता हूं लगता है बच्चू को दिल्ली कि हवा लग गई है अभी सारे भुत उतार ता हूं गंगाराम ने मूंछों पर ताव देकर कहा था । चेनाराम छोटा बेटा था जो दिल्ली शहर में रहकर किसी कोचिंग संस्थान में पी एस सी , आई ए एस कि तैयारी कर रहा था पढ़ने लिखने में अव्वल था साथ ही देखने सुनने में भी सुंदर था दोहरे बदन का मालिक था बचपन से ही कसरत कर शरीर को मजबूत बना लिया ...

कुशल गृहिणी

रविवार कि सुबह  सूर्य उदय का समय था मिस्टर नरेश मजूमदार फ्लेट कि बालकनी से सूर्य उदय उदय कि अलौकिक आभा को देखकर रोमांचित हो रहें थें गोल गोल मटोल घेरे में विभिन्न रंग जैसे कि जीवन कि दशा दिशा का जीने का निर्देशन कर रहे थे वह भावों में खोए हुए थे कि तभी मिसेज मजूमदार एक चाय बिस्कुट अखबार लें आई थी बालकनी में दो कुर्सियां छोटी सी डाइंग टेबल थी दोनों ही बैठ कर चाय पीने लगे थे व अंग्रेजी भाषा के अखबर  का सम्पादकिय पेज मिस्टर मजूमदार ने  लिया था बाकि का अख़बार मिसेज मजूमदार   पन्ने पलटते हुए खास खास खबरें पड़ रही थी तभी उनकी नज़र विज्ञापन पर पड़ी थी विज्ञापन रो हाऊस बंगलों प्लाट का था जो कि वहुत ही लुभावना था जैसे कि शहर कि प्राइम लोकेशन पर ५२०० रूपए में बुक कराएं आज ही आए पहले आए पहले पाएं सभी बैंक से ऋण सुविधा उपलब्ध हैं आदि । मिसेज मजूमदार ने पति को विज्ञापन दिखाते हुए कहा कि कितनी सुन्दर जगह हैं चारों ओर पहाड़ जंगल तालाब प्रकृति के सानिध्य में सुनिए आज छुट्टी है हम अपना घर खोजने जाएंगे । मिस्टर मजूमदार लेख पढ़ रहे थे जो कि प़कृति से इंसान का छेड़छाड़ पर आधारित था...

साइकिल

मग्न लाल शाम को झुग्गी आया था टिफिन का थैला के साथ एक कपड़े कि थैली में कुछ सब्जियां थी उसने उसे घरवाली को पकड़ा दी थी फिर वह हाथ मुंह धोने लगा था घरवाली ने सब्जियां निकाल कर देखी थी जिसमें आलू और हरी मिर्च धनिया ही थी उसने मग्न लाल से कहां था टमाटर नहीं लाएं आलू बिना टमाटर के अच्छे नहीं लगते हैं टमाटर से स्वाद बढ़ जाता है ।  टमाटर बहुत ही महंगे हैं कमला अस्सी रुपए किलो खरीदने कि हिम्मत ही नहीं पड़ती है ऐसा करो आलू को उबालकर हरी मिर्च धनिया नमक कि चटनी बना दें स्वाद अपने आप ही बड़ जाएगा  मग्न लाल ने प्रतिउत्तर में कहा था । कमला :-  सब्जी वाला तेल खत्म हो गया था दुकान पर लेने गई थी पोने दो सो रुपए दाम एक किलो का था में एक पांव लेकर आ गई कितना दिन चलेगा वह अपनी ही धुन में बड़बड़ाने लगी थी । मग्न लाल:- मुंह में कुल्ला करते हुए कमला महंगाई दिन पर दिन अमरबेल कि तरह पनप रही हैं यह हमारे जैसे कमजोर वृक्ष को कभी भी हरा भरा नहीं होनी देगी उसने दार्शनिक लहज़े से अपना तर्क दिया था । मग्न लाल दिहाड़ी मजदूर था सारे दिन पसीना वहां कर तीन सो रूपए ही कमा पाता था पहले कमला भी काम पर जाती ...

" मैं ठग हूँ " काका की कविताएं

अर्थ रात थी नींद में था  सपनों के कि दुनिया में था  न थी देह कि खबर न हि  था  व्यापार हानि लाभ का भय  न था परिवार का गुमान  पुत्र पत्नी बहू बाबूजी मां का खयाल  बस था ऐक ही काम आराम आराम । सहसा  अंतरात्मा सपने मैं आई थी  बोली तू ठग है समझें. मैंने जबाव दिया पगली.  क्यों ऊलजलूल  बक रहीं है  तुझे नहीं मालूम  कि तू ही तो मेरे अंदर हैं  वह  मुस्कुराई बोली पगले मै देती हूँ ऊतर  मैं हू परमात्मा का अंश  कुछ ही छणिक मैं आती हूँ  तुझे नहीं मालूम  मैं हूँ परमात्मा का अंश प़तिबंम  मुझसे रहां नहीं गया  पलट कर कहाँ अरे बावली  क्यों भूल जाती मैं भी तो हूँ  परमेश्वर का परमाणु  ऊन्हीने तो मेरी देह मैं अपना  अणु दान किया है. जिसे कहते हैं  प्राण जिसका घर हैं हाढ मांस. हडडिया कि है नीवं. पवन पानी से अन्य से  बना हुआ है घर.  मांसपेशियों का है परकोटा  शिर को कहते है  ब्रह्मरंध जहां रहता हूँ मैं  फिर बीचोबीच है मेरा सेनापति  जिसे कहते है ह़दय  जो...