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अम्मा

 बात ज्यादा पुरानी नहीं है में इंदौर के मलहरागंज से राशन सामग्री खरीदता था यह सिलसिला अभी भी जारी है कारण वहां के व्यापारी कुछ कम दामों में व्यापार करते हैं ग्राहक को कुछ पैसे कि बचत हो जाती है ऐसे ही में एक दिन बाजार गया था ऐक दुकान पर रूक गया मोटरसाइकिल पार्क कर ही रहा था तभी बूढ़ी भिखारिन अम्मा हाथ फैलाकर सामने आ गई थी वह बार बार बेटा कुछ दे दे भगवान के नाम पर दे दें कह रहीं थीं उन्हें देखकर उनके आग्रह पर मन ही मन कुछ खीज उठी थी फिर उनकि उम्र को देखकर पांच रूपए दे दिए थे वह रूपए लेकर दुआएं देती हुई अन्य दुकान कि और चली गई थी खैर मैंने जरूरत का सामन लिया मोटरसाइकिल से घर आ गया घर आते ही चूंकि गली में या फिर यूं कहें घर के सामने सब्जी का हाथ ठेला खड़ा था ठेले पर व्यापारी ने बहुत सारी साफ ताजी हरी सब्जियां सजा रखी थी सोचा कुछ सब्जियां भी लें लूं खैर मोल भाव कर के व्यापारी ने कुछ ताजी सब्जियां थैले में भरकर दे दी थी जैसे ही पैसा देने के लिए मैंने जेब मे हाथ डाला था पर्स गायब था हालांकि उसमें नगद राशि कुछ ही हजार थी परन्तु मेरे ऐ टी एम् केडिट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस सब उसी में थें चू...

लालच बुरी बला पति पत्नी की कहानी

नाथ पेशे से सिविल  इंजीनियर थे हालांकि सिविल इंजीनियरिंग से एम् टेक करने के बाद  उन्होंने सरकारी नौकरी  के लिए अनेकों बार फार्म भरकर परीक्षा दी थी पर हर बार कुछ अंकों से उत्तीर्ण नहीं हो पाए थे कारण आरक्षण था फिर थक हार कर उन्होंने प्राइवेट सेक्टर को अपना जीवन यापन हेतु चयनित किया था  कठोर परिश्रम के साथ  कंपनी  का क्वांटिटी व क्वालिटी का ध्यान रखा था  उच्च अधिकारीयों ने उन्हें जल्दी ही तरक्की पर तरक्की दे कर प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर आसीन कर दिया था।सब कुछ अच्छा चल रहा था पर कलमुंही महामारी ने एक ही झटके से तहस नहस कर दिया था ।  चूंकि महामारी ने मां बाप को भी चपेट में ले लिया था ह उनके इलाज पर वहुत खर्च हो गया था फिर भी यमराज के दूत उनके प्राण ले गए थे , फिर अपने  परिवार का सारा भरण पोषण उनके कंधे पर था जैसे कि  घरेलू खर्च ,  लाइफ इंश्योरेंस कि फीस ,कार कि इ एम आई ,घर कि भी एम आई , आदि कर्ज पर कर्ज  एसे में एकाएक वे रोजगार होना   समझने वाले ही समझ सकते हैं ऐसी ही मुश्किल परिस्थितियों में घिर गए थें बाबू मुक्ति नाथ ! ...