ऐक था राजा उसका ऐक राजकुमार था राज्य में सब कूशल मंगल था ऐक दिन राजा राजकुमार को राज सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गया राजा के जाने के बाद राजकुमार अपनी सूझबूझ से राज्य चलाने लगा था चारो ओर शांति समृद्धि कायम हो रही थी जो कुछ चाटूकारों को अच्छी नही लगती थी ऐक दिन ऐक गरीब ब्राह्मण राज दरबार में आया था उसे अपनी पुत्री का विवाह करना जा चूकि गरीब होने के कारण धन नहीं था पत्नी के बार बार कहने पर वह आया था पर ब्राह्मण सिद्धांत का पक्का था बिना कुछ दिए हुए भिक्षा भी नहीं लेता था खैर राज दरबार में ऊसका यथोचित सत्कार किया गया था राजकुमार ने आने का कारण पूछा तब ब्राह्मण ने कहा हे राजन मुझे अपनी कन्या का विवाह करना है मेरे पास धन की कमी है अतः मुझे आपसे आर्थिक मदद चाहिए तब राजकुमार ने कहा हे ब्राह्मण आपके लिए रात को खोल देता हूं आपको जितना भी लगे आप ले जा सकते हैं तब ब्राह्मण बोला नहीं नहीं राजन मैं फ्री में किसी से दान भी नहीं लेता मैं आपको एक कागज दे रहा हूं वक्त आने पर इसे पढ़िए गा बहुत काम आएगा खैर ब्राह्मण कागज दे कर धन लेकर अपने घर रवाना ह...
मे ऐक वयापारी ऊधार लेकर शुरू किया बिजनेस कोबिड 19 के लोक डाऊन के बाद चालू किया काम बिन सोचे समझे ले लिया जी ऐस टी नमबर अब हर महीने रिटर्न भरने का रहता था सिरदर्द खैर प़ाईवेट कंपनी मे लिया था काम जहां काम करना हो गया है हराम भाई साहब कुछ अनपढ़ जाहिल बन गये सुपरवाइजर कुछ है पढे लिखे इंजीनियर जो चलते है ऐक घंमड लेकर समझते है कंपनी मेरे बाप कि है. मेरे दादा नाना कि है. ठेकेदार है अपना गुलाम जिसका करना है काम तमाम पैसा कमाकर नहीं जाऐ कसम से करने नहीँ दूगा काम निकालूँगा कमिया नही दूगा पूर कारड नहीं होगा पैमंट रहेगा बैचैन । यह तो कंपनी के सटाफ कि बात है ठेकेदार का काम तमाम है. लेवर रोज छेड़छाड़ कर दबी जुवान से कहती है भाई साहब पैमंट कब मिलेगा मेरा भी घर परिवार है ठेकेदार बढे विश्वास से आज कल कह कह टाल रहा है पर ऊसे है पता मे छूठ बोल रहा हू । जी ऐस टी विभाग से टेलीफोन आता है भाई आप का रिटर्न...