कहते हैं कि मौन में बहुत शक्ति है मौन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं। क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है. कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मौन साधना क्यों करनी चाहिए। कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध...
अर्थ रात थी नींद में था सपनों के कि दुनिया में था न थी देह कि खबर न हि था व्यापार हानि लाभ का भय न था परिवार का गुमान पुत्र पत्नी बहू बाबूजी मां का खयाल बस था ऐक ही काम आराम आराम । सहसा अंतरात्मा सपने मैं आई थी बोली तू ठग है समझें. मैंने जबाव दिया पगली. क्यों ऊलजलूल बक रहीं है तुझे नहीं मालूम कि तू ही तो मेरे अंदर हैं वह मुस्कुराई बोली पगले मै देती हूँ ऊतर मैं हू परमात्मा का अंश कुछ ही छणिक मैं आती हूँ तुझे नहीं मालूम मैं हूँ परमात्मा का अंश प़तिबंम मुझसे रहां नहीं गया पलट कर कहाँ अरे बावली क्यों भूल जाती मैं भी तो हूँ परमेश्वर का परमाणु ऊन्हीने तो मेरी देह मैं अपना अणु दान किया है. जिसे कहते हैं प्राण जिसका घर हैं हाढ मांस. हडडिया कि है नीवं. पवन पानी से अन्य से बना हुआ है घर. मांसपेशियों का है परकोटा शिर को कहते है ब्रह्मरंध जहां रहता हूँ मैं फिर बीचोबीच है मेरा सेनापति जिसे कहते है ह़दय जो...