Skip to main content

Posts

Showing posts with the label समुद्र

कागजी पहलवान

सांध्य का समय था पंछी टोलियां बनाकर आपस में बात चीत करते हुए पंख फड़फड़ाते हुए अपने अपने घोंसले कि और जा रहें थें दूर कहीं पहाड़ पर सूर्य देव कि आखरी किरण अपनी आभा बिखेर रही थी ऐसे ही समय में कागजी पहलवान अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से गांव आ रहा था चूंकि उन दिनों गांव के लिए पक्की सड़क नहीं थी सकरी सी गली थी उसी गली से गांव के जानवर जैसे कि गाय भैंस बकरी बैलगाड़ी ट्रेक्टर के लिए यहीं गली ही थी तभी तो कागजी पहलवान को संध्या समय कि ऐसी बेला में बुलेट चलाने में परेशानी आ रही थी वह कभी जोर जोर होरन बजाता तब कभी बुलेट ऐक और करके खड़ा हो जाता तभी ऐक चरवाहे ने कहा लगता है कि पहलवान कोई मेहमान आए है  हां हां भाई ससुराल से आए है पहलवान ने मूछ पर ताव देकर जबाब दिया था दरअसल बुलेट मोटरसाइकिल के पीछे कि सीट पर सुन्दर सजीला नौजवान बैठा था । हां हां भैया भौजी के तब तो भाई होंगे ही ही ही कर के हंसने लगा था  खैर कागजी पहलवान जैसे तैसे गांव के नजदीक पहुंच कर शराब कि दुकान पर रूक गया था बुलेट मोटरसाइकिल को खड़ा कर वह काउंटर पर पहुंच गया था  कहां से आना हो रहा है पहलवान सेल्समैन ने पूछा था  रेलवे स्टेशन से  ल

एस्कार्ट सर्विस का माया जाल कहानी

पिछली तीन कोरोना लहर में बहुत सारे परिवारों ने अपनों को खोया किसी ने मां को तब किसी ने पिता,भाई बहिन पति पत्नी खोने वाले लोगों का दर्द कोई भी साझा नही कर सकता जानें वाले तो चले गए छोड़ गए यादें यादें । मिस्टर अजीत नौ सेना में अधिकारी थे जीवन के अनेक वर्ष पानी के जहाज, पनडुब्बी में व्यतीत हुए थे कभी कभी तो सागर कि अथाह गहराई में महीनों पनडुब्बी में समुद्री सीमा कि निगरानी करते रहते थे तब कभी समुद्र सतह पर जहाज के डेक पर खड़े होकर दूर दूर तक समुद्र ही दिखाई देता था कभी कभी कोई नटखट व्हेल मछली असीमित जल में गोते लगाते दिख जाया करती थी तब कभी दुश्मन देश के जहाज जो अपने देश कि सीमा कि निगरानी करते थे खैर समुद्र, जहाज,का, जीवन घर परिवार से अपने आप में अलग था जहा पर कठोर अनुशासन का पालन करना होता था समय का उपयोग भी निश्चित था सहकर्मियों में महिलाएं भी थी उन्हें भी कठोर अनुशासन का पालन करना होता था। मिस्टर अजीत कुछ महीने या फिर यूं कहें कि कुछ सप्ताह ही घर परिवार को दे पाते थे हालांकि वह शादीशुदा थें जीवन संगिनी भी समझदार पढ़ी लिखी खूबसूरत थी जो दो बच्चों कि देखरेख के साथ माता पिता का भी ख्याल

काल गर्ल बेव सीरीज स्टोरी भाग ०६

 पिछले भाग से आगे.... करूणा को उस नौजवान में राजकुमार जैसा निश्छल मन प्रेम दिखाई दे रहा था यह नौजवान ही उसकि डूबती नैया को पार लगा सकता है हालांकि उसे धन कि कमी नहीं थी करोड़ रुपए का फ्लेट कार नागपाल पहले ही नाम कर गया था बूढ़े मंत्री ने भी उसे अच्छा खासा धन दिया था जो कि बैंक में जमा था उस धन से वह अच्छा खा सकतीं थीं कपड़े पहन सकती थी आराम दायक जीवन व्यतीत कर सकती थी परन्तु वह तो धन के अलावा सच्चे प्यार कि तलाश में थी सच्चे हमसफ़र कि ख़ोज में थी जो कि उसकी भावनाओं को समझ सकें जो उसके मनोभाव को पढ़ कर अच्छा बर्ताव करें जो उसकि देह को भोग कि वस्तु नहीं समझें उसके टूटे दिल को दुरस्त कर दें । दोनों कि अक्सर मुलाकात होने लगीं थी एक दिन वह उसके घर पहुंच गयी थी घर के नाम पर खोली थीं अन्दर कुछ खानें के वर्तन गैस टंकी चूल्हा बाल्टी मग ही था सारा कमरा अस्त व्यस्त था विस्तर के नाम पर दरी चादर तकिया ही था एक और रंग के डिब्बे कूचे बोर्ड रखा था उस पर उसकी जैसी खूबसूरत पेंटिंग्स लगभग तैयार थी बस कंटीली बढ़ी बढ़ी आंखें में रंग भरना बाकी था कुल मिलाकर कलाकार का ख़ुद का जीवन अस्त व्यस्त रहता है उसके उप

"काल गर्ल "बेव सिरीज़ स्टोरी भाग -4 करूणा कि व्यथा कथा

 पिछले भाग से आगे....  पिछले भाग से आगे.... करूणा का जीवन यूं ही लक्ष्य हीन आगे बढ़ रहा था वह सारे दिन नशें में डूबी रहती व अपने भाग्य को कोसती रहतीं थीं कभी कभी घर कि याद आती तब अम्मा अम्मा कह कर रोने लगती थी कभी कभी भाई बहिन को अपने आसपास महसूस करती जो उससे कहते दीदी दीदी आप क्या थी आप तो पड़ने में अव्वल थी आप तो आइ ए एस डाक्टर बनना चाहतीं थी और अब क्या बन गई छी छी आप तो नशा करने लगीं आप मेरी दीदी नहीं हो सकती नहीं हों सकतीं कभी कभी पिता जी को अपने नजदीक पाती जो उसके सिर पर हाथ फेरकर कहते बिटिया गलती मेरी है मैंने ही तुझे मोबाइल फोन दिलाया था उसी फोन से तेरा सत्यानाश हुआ तेरी तो कच्ची उम्र थी भावना में वह ने वालीं फिर इस उम्र में पर लिंग का आकर्षण होना स्वाभाविक था इस उम्र में अच्छे बुरा सोचने कि समझ कम ही रहती थी अगर मैंने तेरे फोन पर निगरानी रखीं होती तब तेरी गलती पर तुझे समझाता फिर पगली अगर तूने गलती कि थी तब ऐक बार तो मुझे या अपनी मां को बताती हम कुछ न कुछ रास्ता निकाल कर ..... फिर पिता जी रोने लगे थें कभी कभी उसका प़ेमी राजकुमार उसकी घायल देह पर मरहम लगा कर उससे कहता करूणा मैंने

"कार्ल गर्ल " वेब सीरीज भाग२ करूणा कि व्यथा कथा

पहले भाग से आगे.....… हां यकिन नहीं आपने ऐसा क्यों किया मेरे राजकुमार देखो तो अब तुम्हारी रानी जीवन के समर के मैदान में अकेली लड रही  है दूर दूर तक कोई सहारा नहीं मुझे भी साथ ले चलते फिर कुछ छड़ों बाद तुम्हें पता है मेरे राजकुमार जिस देह कि खूबसूरती का आप तारीफें के पुल बांधते थे जिस देह के अंगों पर अपने प्यार कि मुहर लगा कर कहते थें देख करूणा कभी भी किसी अन्य  पुरुष से तूने बातचीत कि या फिर मेरी संपत्ति को किसी ने छेड़छाड़ कि मुझे भनक भी लगीं तब में उसी समय अपने प्राण त्याग दुंगा मेरे राजकुमार आज तुम्हारी रानी किसी पुरुष कि रखैल है  फिर वह मेरी देह के साथ कैसा व्यवहार करता है कहने में संकोच होता है कहते हैं कि मरने के बाद भी कुछ महीने या दिन आत्मा अपने सगे संबंधियों या फिर अपने प्रिय के आसपास भटकती रहती हैं तब आप तों उस सेठ का मेरे साथ विस्तर पर देखते होंगे ।  भावविभोर होकर वह रोने लगी थी सामने अथाह सागर उसके आंसुओं कि अविरल धारा को देखकर दुखी मन से अपने तट बंध से बाहर निकलने कि कोशिश कर रहा था मानो वह कह रहा था कि देख बेटी यह मानव समाज तेरे लिए नहीं यह समाज अब अपने आप को भूल गया बेटी