कहते हैं कि मोन में बहुत शक्ति है मोन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं। क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है. कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मोन साधना क्यों करनी चाहिए। कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध...
जी हां मैं लेखक हूं में हू कल्पना लोक में पहुंच जाता हूं बिन प्लेन मंगल ग्रह रचाता हूं चांद पर बस्तियां खोजता हूं ओक्सीजन ओर पानी क्यों कि मैं ऐक लेखक हूं ।। मेरे पास है संवेदना कोमल हृदय जो गड़ता रहता है नित नए विचार और अविष्कार शब्द है अपरम्पार क्यों कि मैं ऐक लेखक हूं।। मैंने ही लिखें है बेद पुरान और गीता जो दिखाते हैं मानव को राह मेरा ही है रामचरितमानस महाकाव्य मे सूरदास भी हू https://www.kakakikalamse.com/2020/12/blog-post_81.html टालस्टाय गुरूदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर हूं मुंशी प्रेमचंद का कथा संसार क्यों कि मैं ऐक लेखक हूं ।। में ऐक शिल्पी हूं हू शब्दों का आर्किटेक्ट में ही हूं महान विज्ञानिको न्यूटन का सिद्धांत में समय हूं क्यों कि में ऐक लेखक हूं ।। मैंने ही कि थी खोज बिजली और परमाणु बम मैंने ही कि थी सो सौरमंडल के नव गृह जो देते है हमें नयी ऊर्जा बताते है जीवन मंत्र।। मेरी नजर में है राम बुद्ध महावीर जीसस और अल्लाह ऐक सम...