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लखटकिया किस्मत के धनी मूर्ख कि लोक कथा

 पुराने समय कि बात हैं एक गांव था उस गांव में एक गरीब भोला नाम का अपने परिवार के साथ रहता था परिवार में माता पिता बेटा बहू ही रहते थें वह सारे दिन मेहनत मजदूरी कर के  व जंगल से लकड़ी काटकर भरण पोषण कर रहा था लड़का मां का बहुत ही आज्ञाकारी पुत्र था  जैसा मां कहती वह वहीं करता था उसकि पत्नी मायके गई हुई थी उससे मां ने कहा था बेटा बहुत दिन हो गए हैं तुम जाकर बहू को मायके से वापस घर लें आना क्यों कि में तो तुम्हारे पिता जी सारे दिन मजदूरी करते हैं  वापस घर आते आते में थक जाती हूं फिर घर पर आकर खाना पकाना व अन्य काम करने से और थक जाती हूं इसलिए तुम कल सुबह ससुराल निकल जाना । सुबह से ही मां ने खाना बना कर पैक कर दिया था  फिर झोले में खाना  रखकर कहां था बेटा रास्ते में कहीं भी कुआं मिलें तब वहां दोपहर का भोजन करना और फिर कही रास्ते में कोई भी देव स्थान दिखाई दे तब दर्शन जरूर करना फिर जिस जगह मतलब रास्ते में  सूर्य देव अस्त हो वहीं रात्रि विश्राम करना फिर सुबह आगे कि यात्रा करना आदि निर्देश दिए थे । भोला मात भक्त था मां के सारे निर्देशों को ध्यान में रखकर उसने...

2021 कोविड 19

 मे ऐक वयापारी  ऊधार लेकर शुरू किया  बिजनेस  कोबिड 19 के लोक डाऊन के बाद  चालू किया काम  बिन सोचे समझे ले लिया जी ऐस टी नमबर  अब हर महीने रिटर्न भरने का  रहता था सिरदर्द  खैर प़ाईवेट कंपनी मे लिया था काम  जहां काम करना हो गया है हराम  भाई साहब कुछ अनपढ़ जाहिल  बन गये सुपरवाइजर  कुछ है पढे लिखे इंजीनियर जो चलते है ऐक घंमड लेकर  समझते है कंपनी मेरे बाप कि है. मेरे दादा नाना कि है. ठेकेदार है अपना गुलाम  जिसका करना है काम तमाम   पैसा  कमाकर नहीं जाऐ  कसम से करने नहीँ दूगा काम  निकालूँगा कमिया  नही दूगा पूर कारड  नहीं होगा पैमंट  रहेगा बैचैन । यह तो कंपनी के  सटाफ कि बात है  ठेकेदार का काम तमाम है. लेवर रोज छेड़छाड़ कर  दबी जुवान से कहती है  भाई साहब  पैमंट कब मिलेगा  मेरा भी घर परिवार है  ठेकेदार बढे विश्वास से  आज कल कह कह टाल रहा है  पर ऊसे है पता  मे छूठ बोल रहा हू । जी ऐस टी  विभाग से टेलीफोन आता है  भाई आप का रिटर्न...

डी एन ए कहानी

 यो तो जनवरी महीने के आखिरी सप्ताह तक सर्दी के साथ कोहरा अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है पर पर्यावरण के लहज़े से कभी कम कभी ज्यादा रहता है हालांकि कोरोनावायरस के काल में सर्दी गर्मी कोई मायने नहीं रखती क्यों कि इस काल में हार्ट अटेक ब्लड प्रेशर निमोनिया कैंसर सुगर जैसी लाईलाज   ओर अन्य बिमारी का कहीं भी नामोनिशान नहीं है सरकार के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का पूरा ध्यान कोबिड 19 पर है भाई साहब क्यों न हो सरकारी अमला का कोइ भी कर्मचारी इस काल में यम लोक पधारे भले ही कोई बीमारी हो घर वालों को पचास लाख रूपए तो मिलना ही है साथ ही अनुकंपा नियुक्ति अब भला परिवार का कोई भी व्यक्ति क्यों प्रश्न चिन्ह खड़ा करेगा ?? खैर तेज सर्दी कोहरे को देखकर रसिकलाल का मन बिस्तर छोड़ने को तैयार नहीं था कारण रात्रि अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से दिमाग हैंग हो रहा था या यूं कहें कि दिमाग अमेरिका इंग्लैंड यूरोप कि यात्रा कर रहा था दूसरा कारण रसिकलाल मदहोश होकर अपनी प्राण प्यारी मिस अनुराधा से व्हाट्सएप पर ओन लाइन होकर ऐक दूसरे के तन बदन या और कुछ .....,?? रसिकलाल के...