घर बंदी के पहली कोरोनावायरस कि लहर को आज भी भूला नहीं पा रहा हूं शायद यह मानव इतिहास का पहला घर जैल था हालांकि हम मानवों ने अपने निजी हितों के लिए जल जंगल जमीन का दोहन किया जमीन के अंदर से गैस खनिज पदार्थ डीजल पेट्रोल कोयला निकाला, समुद्र के पानी को रीसाइक्लिंग मशीन से अपने पीने के लिए तैयार किया , जंगल के हरे भरे लहलहाते पेड़ों को काटकर अपने लिए फर्नीचर सोफ़ा सेट या फिर घर के लिए दरवाजे खिड़कियां या फिर औषधि के लिए इनका उपयोग किया पहाड़ को काटकर हमने सड़क मार्ग के लिए घर के भराव के लिए ,या फिर किसी सीमेंट फैक्ट्री , साबुन वगैरह के लिए पथरीली चट्टान को काटकर उसका चूर्ण बनाकर उपयोग किया , जिससे पहाड़ लगभग खत्म होने के कगार पर है , हमारे स्वार्थ ने जंगली जानवर जीवों को भूखों रहने के लिए मोहताज कर दिया यही कारण है कि हाथी ,शेर,चीता , तेंदुआ, भालू,बाघ,कभी कभी अपनी सीमा लांघ कर इंसानी बस्तीयों में आ कर इंसान पर आक्रमण कर रहे हैं क्या हम इसमें दोशी नहीं है ??् दूसरी ओर हमने अपने अपने देश कि सीमा कि रक्षा के लिए घातक हथियारों का अविष्कार किया जैसे कि जैविक, रसायनिक आदि जो कि पल भर ...
जून के पहले सप्ताह उमस से भरी हुई गर्मी में घर से बाहर निकलना दुश्वार नजर आता है शहरों में लोग ऐ सी कुलर कि ठंडी-ठंडी हवा में यह तपते मौसम का लुत्फ उठाते हैं उसके विपरीत गांव में किसान ऐसे ही मौसम में अपने अपने खेतों में पारली जलाना देशी खाद डालने का काम करते हैं वर्षा ऋतु आरंभ हो गई थी मौसम कि पहली बारिश ने दस्तक दे दी थी फिर भी उमस से राहत नहीं मिल रही थी किसानों ने अपने अपने हल बखर बैलों को सजाकर टैक्टर सुधार कर तैयार कर लिए थे दूर दूर तक कृषक अपने अपने खेतों में जुताई कर रहे थे कहीं-कहीं टैक्टर में बंधे डी जी से गाना बजाना कि आवाज आ रही थी कहीं कहीं कोई किसान फाग या लोकगीत गाकर अपना हर्षोल्लास दर्ज कर रहा था चारों तरफ उत्सव का माहौल था पंछी भी इस उत्सव में अपनी-अपनी चहचहाहट से उपस्थित दर्ज कर रहें थे मंगल ऐक साधारण सा किसान था थोड़ी सी जमीन थी ऊसी को घरवाली बच्चों के साथ बारह महीने कुछ न कुछ फसल सब्जी बोता रहता था मेहनत रंग लाई और देखते ही देखते पक्का मकान मोटरसाइकिल ट्रेक्टर खरीद कर बढ़े किसानों कि फेरहिस्त में शामिल हों गया था दूसरी ओर ...