यूं मुक्ति के अनेकों अर्थ है यानी मुक्त होने के जैसे कि कर्ज से मुक्ति,मन कि चिंता से मुक्ति, ,जीवन से मुक्ति इत्यादि पर ठाकुर साहब उस थकाऊ नौकरी से मुक्ति पाना चाहते थे जहां पर समय का कोई भी हिसाब किताब नहीं था , जहां का स्टाफ के कुछ सदस्यों को इंसान से कोई भी लेना देना नहीं था उसका कारण यह था कि बे कंपनी कि तरफ से पड़ लिखे इंजीनियर थे यानी किसी के पास सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा था या फिर डिग्री पर भले ही धरातल पर काम करने में बे सब जीरो थे पर कंपनी के अफसर उन्हें ही ज्यादा इज्जत देते थे उन्हें ही ज्यादा पावर दिए गए थे जैसे कि सुपरवाइजर फोर मेन से ज्यादा से काम लेना मजदूरों को इंसान नहीं समझना , ठेकेदार से कमिशन लेंना आदि ठाकुर साहब कंट्रक्शन कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर थें उनका नाम नरेंद्र सिंह ठाकुर था बड़े ही सरल हृदय व दयालु थे साथ ही मेहनत कश कर्मठ, ईमानदार इसी के कारण वह मालिक लोगों के खासमखास थें उन्हें बहुत सारी जिम्मेदारी दी गई थी जैसे कि मटेरियल पर नजर रखना उसकी क्वालिटी चेक करना साइट कि अन्य व्यवस्थाएं फिर कंट्रक्शन के हर आइटम कि क्वालिटी कंट्रोल करना इत्याद...
कल्याणी अपना फेसबुक एकाउंट देख रही थी उसमें बहुत सारे फ़ेनड रिक्वेस्ट के नोटीफिकेशन थें लगभग दो सो के आस पास रहें होंगे जो अधिकांश युवा लडको से बूढ़े पुरुष के थें वह मन ही मन बोलीं थी न जाने इन लोगों की कैसी सोच हों गयी कोई लड़की या शादीशुदा महिला कि फोटो दिखाई दी तब धड़ाधड़ फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज देते हैं वह सभी को देख रहीं थीं हालांकि उसमें कुछ उसकी पुरानी सहेलियों व जान पहचान वाले भी थी वह उन्हें मित्र बनाती जाती थी और अनजान लोगों को रिजेक्ट कर रहीं थीं परन्तु एक फोटो पर उसकी नजर ठहर गई थी जो युवा सुंदर सजीला जवान लड़का था उसने उसकि प्रोफाइल को खोलकर उसके बारे में सब जाना था फिर उसकि पोस्टें भी देखीं थीं सभी पोस्टें उसे अच्छी लगीं थीं तभी तो उसने उसकी रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली थी अब वह मित्र थें कुछ देर बाद उसके मैसेंजर पर हाय नमस्ते का मैसेज आया था उसने रिप्लाई दिया था चेटिंग चालू हो गई थी । हालांकि कल्याणी शादी शुदा थी दो बच्चों कि मां थी पति बिमलेश कुमार भी सुंदर समझदार था सबसे बड़ी बात वह अच्छा कमाता था क्योंकि उसकी परचून कि दुकान बीच बाजार में थीं उसके मधुर व्यवहार से दुकान अच्छी ...