कहते हैं कि मौन में बहुत शक्ति है मौन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं। क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है. कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मौन साधना क्यों करनी चाहिए। कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध...
दो भाई थे एक का नाम मनी राम था दूसरे आ नाम गुड़ी राम था जब तक माता पिता जिंदा थे मिलकर रहते थे दोनों का व्याह हो गया था खेती बाड़ी अच्छी थी दो दो ट्रेक्टर , मोटरसाइकिल,कार थी अच्छा पक्का बड़ा तीन मंजिला मकान था कुल मिलाकर माता पिता इश्वर के आर्शीवाद से हर प्रकार से सुखी थे धन धान्य रूपए पैसा कि कोई भी कमी नहीं थी जब तक माता पिता जीवित थे सब कुछ अच्छा चल रहा था फिर पहले पिता जी स्वर्ग सिधार गए थे उनके गुजर जाने के बाद उन्होंने संपत्ति का बंटवारा करने का निश्चय किया था कुछ नजदीकी रिश्तेदार के अलावा गांव के पंच परमेश्वर इकट्ठे हुए थे सभी संपत्ति आधी आधी बांटी गई थी जैसे कि घर जमीन टैक्टर गाय भैंस ज़ेवर रूपए पैसा पर अब बात यहां अटक गई थी कि अम्मा कि सेवा कोन करेगा बड़ी बहू सेवा करने को राजी नहीं थी फिर छोटी बहू से पूछा गया था तब वह भी न नखरे करने लगी थी पंचों ने विचार कर कहा था कि जो भी दोनों भाइयों में से अम्मा कि सेवा करेगा उसे ढाई बीघा जमीन उनके मरने पर उसी को मिलेंगी चूंकि अम्मा के नाम पर गांव के नजदीक ही जो कुआं था उनके नाम पर ही था अब ढाई बीघा जमीन कि लालच में छोटी ...