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Showing posts with the label गरीब 'कोरोना'महामारी' लाचारी' दीवाली' मजदूर' शोषण' बेवसी' से' भरी हुई कहानी

कागजी पहलवान

सांध्य का समय था पंछी टोलियां बनाकर आपस में बात चीत करते हुए पंख फड़फड़ाते हुए अपने अपने घोंसले कि और जा रहें थें दूर कहीं पहाड़ पर सूर्य देव कि आखरी किरण अपनी आभा बिखेर रही थी ऐसे ही समय में कागजी पहलवान अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से गांव आ रहा था चूंकि उन दिनों गांव के लिए पक्की सड़क नहीं थी सकरी सी गली थी उसी गली से गांव के जानवर जैसे कि गाय भैंस बकरी बैलगाड़ी ट्रेक्टर के लिए यहीं गली ही थी तभी तो कागजी पहलवान को संध्या समय कि ऐसी बेला में बुलेट चलाने में परेशानी आ रही थी वह कभी जोर जोर होरन बजाता तब कभी बुलेट ऐक और करके खड़ा हो जाता तभी ऐक चरवाहे ने कहा लगता है कि पहलवान कोई मेहमान आए है  हां हां भाई ससुराल से आए है पहलवान ने मूछ पर ताव देकर जबाब दिया था दरअसल बुलेट मोटरसाइकिल के पीछे कि सीट पर सुन्दर सजीला नौजवान बैठा था । हां हां भैया भौजी के तब तो भाई होंगे ही ही ही कर के हंसने लगा था  खैर कागजी पहलवान जैसे तैसे गांव के नजदीक पहुंच कर शराब कि दुकान पर रूक गया था बुलेट मोटरसाइकिल को खड़ा कर वह काउंटर पर पहुंच गया था  कहां से आना हो रहा है पहलवान सेल्समैन ने पूछा था  रेलवे स्टेशन से  ल

गरीबा कि दीपावली गरीब मजदूर के शोषण कि कहानी

 यूं        कोरोनावायरस ने   सेठ साहूकारों कि दीवाली फीकी कर दी थी फिर भला   दिहाड़ी मजदूरों कि  क्या धनतेरस का दिन था कहते हैं इस दिन लक्ष्मी जी का धनाढ्य घर से गरीब घर में पदार्पण होता है या नहीं होता है यह तो आस्था का विषय है या यो कहें कर्म का लेखा जोखा है ऐसा ही गरीब था पेशे से पेंटर बढ़े बढ़े बंगलों में अपने हाथों कि कलां से ठेकेदार के अंडर में काम करता था विभिन्न प्रकार के रंगों को बढ़ी खूबसूरती से बंगलों में उतार देता था  वह भी कम समय में ठेकेदार उसकी हुनर का को पहचानता था फिर भी उसे डांट फटकार देता था कि देख यहां पर यह कमी है इस दीवार में धब्बा है आदी आदी कारण यह कि कहीं यह मज़दूरी ज्यादा न मांग लें खैर यह तो हर मजदूर को अपनी हुनर का ठेकेदारों से प्रार्थमिक मिलता था !  गरीबा :- अपने हाथों कि कला से बंग्ले कि दीवार मे रंग भर रहा था तभी ठेकेदार दुःखी राम ने पदार्पण किया बंग्ले में और भी पेंटर काम कर रहे थे दुःखी राम ने चहलकदमी करते हुए पूरे बंग्ले का निरीक्षण  किया था फिर गरीबा के पास पहुंच कर वार्तालाप करने लगा था । दुःखी राम :- काम चोरी कि भी हद होती है सारे दिन में जरा सा भी