कहते हैं कि मौन में बहुत शक्ति है मौन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं। क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है. कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मौन साधना क्यों करनी चाहिए। कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध...
बात ज्यादा पुरानी नहीं है में इंदौर के मलहरागंज से राशन सामग्री खरीदता था यह सिलसिला अभी भी जारी है कारण वहां के व्यापारी कुछ कम दामों में व्यापार करते हैं ग्राहक को कुछ पैसे कि बचत हो जाती है ऐसे ही में एक दिन बाजार गया था ऐक दुकान पर रूक गया मोटरसाइकिल पार्क कर ही रहा था तभी बूढ़ी भिखारिन अम्मा हाथ फैलाकर सामने आ गई थी वह बार बार बेटा कुछ दे दे भगवान के नाम पर दे दें कह रहीं थीं उन्हें देखकर उनके आग्रह पर मन ही मन कुछ खीज उठी थी फिर उनकि उम्र को देखकर पांच रूपए दे दिए थे वह रूपए लेकर दुआएं देती हुई अन्य दुकान कि और चली गई थी खैर मैंने जरूरत का सामन लिया मोटरसाइकिल से घर आ गया घर आते ही चूंकि गली में या फिर यूं कहें घर के सामने सब्जी का हाथ ठेला खड़ा था ठेले पर व्यापारी ने बहुत सारी साफ ताजी हरी सब्जियां सजा रखी थी सोचा कुछ सब्जियां भी लें लूं खैर मोल भाव कर के व्यापारी ने कुछ ताजी सब्जियां थैले में भरकर दे दी थी जैसे ही पैसा देने के लिए मैंने जेब मे हाथ डाला था पर्स गायब था हालांकि उसमें नगद राशि कुछ ही हजार थी परन्तु मेरे ऐ टी एम् केडिट कार्ड ड्राइविंग लाइसेंस सब उसी में थें चू...