यूं मुक्ति के अनेकों अर्थ है यानी मुक्त होने के जैसे कि कर्ज से मुक्ति,मन कि चिंता से मुक्ति, ,जीवन से मुक्ति इत्यादि पर ठाकुर साहब उस थकाऊ नौकरी से मुक्ति पाना चाहते थे जहां पर समय का कोई भी हिसाब किताब नहीं था , जहां का स्टाफ के कुछ सदस्यों को इंसान से कोई भी लेना देना नहीं था उसका कारण यह था कि बे कंपनी कि तरफ से पड़ लिखे इंजीनियर थे यानी किसी के पास सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा था या फिर डिग्री पर भले ही धरातल पर काम करने में बे सब जीरो थे पर कंपनी के अफसर उन्हें ही ज्यादा इज्जत देते थे उन्हें ही ज्यादा पावर दिए गए थे जैसे कि सुपरवाइजर फोर मेन से ज्यादा से काम लेना मजदूरों को इंसान नहीं समझना , ठेकेदार से कमिशन लेंना आदि ठाकुर साहब कंट्रक्शन कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर थें उनका नाम नरेंद्र सिंह ठाकुर था बड़े ही सरल हृदय व दयालु थे साथ ही मेहनत कश कर्मठ, ईमानदार इसी के कारण वह मालिक लोगों के खासमखास थें उन्हें बहुत सारी जिम्मेदारी दी गई थी जैसे कि मटेरियल पर नजर रखना उसकी क्वालिटी चेक करना साइट कि अन्य व्यवस्थाएं फिर कंट्रक्शन के हर आइटम कि क्वालिटी कंट्रोल करना इत्याद...
कहते हैं कि रात्रि के अंतिम पहर में देखे गए स्वप्न कुछ संकेत देकर जातें हैं जिन्हें समझना आसान नहीं है जिन्होंने समझा उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया कहीं पढ़ा था कि सिलाई मशीन बनाने वाले सज्जन ने सारा ढांचा तैयार कर लिया था सभी कलपुर्जे जोड़ दिए थे परन्तु वह धागा कि सुई कहा लगाएं समझ में नहीं आ रहा था दिमाग पर बहुत जोर डाला अनेकों बार कल पुर्जे को चैक किया ढांचा में भी फेरबदल किया परंतु सुई कहां फिट करें समझ से परे था । हर प्रकार से हतोत्साहित होकर वह अवसाद ग्रस्त हो गये थें स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ गया था कारण जो कि वर्षों कि मेहनत पर पानी फिर गया था ऐसे ही अवसाद ग्रस्त अवस्था में स्वप्न में कोई उनके सीने पर सुईयां चुभा रहा था वह दर्द से छटपटाने लगे थें उसी छटपटाने से उनकी नींद खुल गई थी आंख मलते ही याद आया था कि वह तो एक स्वप्न था सहसा उन्हें लगा कि सीने पर सुइयां चुभोना कुछ संकेत दे रहा है सिलाई मशीन के लिए कुछ कह रहा है फिर क्या था उन्होंने स्वप्न के संकेत को समझकर ढांचे में सुधार कर सुइ फिट कर संसार के सामने सिलाई मशीन का अविष्कार कर अपना हमेशा हमेशा के लिए इतिहास में न...