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तलाक पत्नी के त्याग समर्पण की कहानी

सावन माह में वर्षांत होना तो आम बात है परन्तु इस बार जरूरत से ज्यादा बारिश हो रही थी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया शहर के हर उस हिस्से को जहां जल भराव ज्यादा था पत्रकार छाता लगाकर घुटने तक पानी कि तस्वीरें चीख चीख कर बयां कर रहे थे उनके अनुसार मानों धरती जल में समां जाएगी  खैर ऐसी ही घनघोर वारिस में नीलमा आठवें माले पर स्थित फ्लैट कि खिड़की के पास कुर्सी पर बैठी हुई पति का आने का इंतजार कर रही थी वह बार बार दीवाल घड़ी पर नज़र डाल रहीं थीं अर्ध रात्रि हो गई थी साढ़े बारह बज रहे थे परन्तु अभी तक नहीं आएं थें मन में नाना प्रकार के विचार पनप रहे थे कहीं कोई दुर्घटना नहीं ऐसा नहीं सोचते पर फोन भी तो नहीं उठाते अब क्या करूं तभी दूर कार कि हैडलाइट कि रोशनी दिखाई दी थी थोड़ी देर बाद कार गेट के अंदर पहुंच गई थी अब उसे तसल्ली हुई थी ज़रूर गौरव ही आ रहें होंगे । डोरबेल कि घंटी बजी थी उसने डोरबेल के आइ सीसे से आंगतुक को देखा था फिर दरवाजा खोला था आंगतुक के हल्के हल्के कदम लड़खड़ा रहें थें नाक के दोनों नथुनों से सिगरेट शराब कि मिली जुली  गंध आ रही थी आंगतुक सोफे पर बैठ गए थे । आप आज फिर लेट आए

"तलाक" "पत्नी के त्याग समर्पण की कहानी

सावन माह में वर्षांत होना तो आम बात है परन्तु इस बार जरूरत से ज्यादा बारिश हो रही थी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया शहर के हर उस हिस्से को जहां जल भराव ज्यादा था पत्रकार छाता लगाकर घुटने तक पानी कि तस्वीरें चीख चीख कर बयां कर रहे थे उनके अनुसार मानों धरती जल में समां जाएगी  खैर ऐसी ही घनघोर वारिस में नीलमा आठवें माले पर स्थित फ्लैट कि खिड़की के पास कुर्सी पर बैठी हुई पति का आने का इंतजार कर रही थी वह बार बार दीवाल घड़ी पर नज़र डाल रहीं थीं अर्ध रात्रि हो गई थी साढ़े बारह बज रहे थे परन्तु अभी तक नहीं आएं थें मन में नाना प्रकार के विचार पनप रहे थे कहीं कोई दुर्घटना नहीं ऐसा नहीं सोचते पर फोन भी तो नहीं उठाते अब क्या करूं तभी दूर कार कि हैडलाइट कि रोशनी दिखाई दी थी थोड़ी देर बाद कार गेट के अंदर पहुंच गई थी अब उसे तसल्ली हुई थी ज़रूर गौरव ही आ रहें होंगे । डोरबेल कि घंटी बजी थी उसने डोरबेल के आइ सीसे से आंगतुक को देखा था फिर दरवाजा खोला था आंगतुक के हल्के हल्के कदम लड़खड़ा रहें थें नाक के दोनों नथुनों से सिगरेट शराब कि मिली जुली  गंध आ रही थी आंगतुक सोफे पर बैठ गए थे । आप आज फिर लेट आए

डी एन ए कहानी

 यो तो जनवरी महीने के आखिरी सप्ताह तक सर्दी के साथ कोहरा अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है पर पर्यावरण के लहज़े से कभी कम कभी ज्यादा रहता है हालांकि कोरोनावायरस के काल में सर्दी गर्मी कोई मायने नहीं रखती क्यों कि इस काल में हार्ट अटेक ब्लड प्रेशर निमोनिया कैंसर सुगर जैसी लाईलाज   ओर अन्य बिमारी का कहीं भी नामोनिशान नहीं है सरकार के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का पूरा ध्यान कोबिड 19 पर है भाई साहब क्यों न हो सरकारी अमला का कोइ भी कर्मचारी इस काल में यम लोक पधारे भले ही कोई बीमारी हो घर वालों को पचास लाख रूपए तो मिलना ही है साथ ही अनुकंपा नियुक्ति अब भला परिवार का कोई भी व्यक्ति क्यों प्रश्न चिन्ह खड़ा करेगा ?? खैर तेज सर्दी कोहरे को देखकर रसिकलाल का मन बिस्तर छोड़ने को तैयार नहीं था कारण रात्रि अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से दिमाग हैंग हो रहा था या यूं कहें कि दिमाग अमेरिका इंग्लैंड यूरोप कि यात्रा कर रहा था दूसरा कारण रसिकलाल मदहोश होकर अपनी प्राण प्यारी मिस अनुराधा से व्हाट्सएप पर ओन लाइन होकर ऐक दूसरे के तन बदन या और कुछ .....,?? रसिकलाल के तकिए के पास म