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मौन साधना दर्शन लेख

 कहते हैं कि मौन में बहुत शक्ति है मौन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं। क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक ​​जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है. कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मौन साधना क्यों करनी चाहिए। कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध...

जन्मदिन

 बंग्ले में नाती के जन्म दिवस पर भव्य आयोजन किया गया था शहर के जाने माने सम्मानित रहीश हाथों में गुलदस्ता भेंट लेकर सपरिवार सहित आ रहें थें बेटा धनीराम बहू लछमी बंगले के गेट पर सभी मेहमानों का मुस्कुराते हुए स्वागत कर रहे थे घर के नौकरों को पहले ही आदेश दिया गया था कि मेहमानों कि खातिर दारी में कोई भी कसर नहीं छोड़ी जाए तभी तो नोकर दौड़ दौड़ कर चाय काफी पानी सभी मेहमानों को सर्व कर रहे थे सम्मानित धनाढ्य मेहमानों के आने के बाद जन्म दिन के कैक काटने कि तैयारी हों गई थी थोड़ी ही देर में हाल में हैप्पी बर्थ डे जियो हजारों साल कि ध्वनियां सुनाई दे रही थी साथ ही तालियां बजाने कि आवाज आ रही थी कुछ देर बाद पार्टी चालू हो गई थी मेहमानों के लिए खास तरह कि व्हिस्की मंगाई गई थी जाम पर जाम टकराए जा रहे थे हाल में मध्यम आवाज में रोमांटिक संगीत बज रहा था उस संगीत पर मेहमान थिरक रहें थें स्वादिष्ट रूचिकर भोजन का इंतजाम किया गया था बेटा बहू अपनी रहीशी का भरपूर दिखावा कर रहे थे  परन्तु बेटा बहू शायद भूल गए थे कि घर में बूढ़ी मां भी हैं जो कि विस्तर पर बहुत सारी बीमारी के साथ दो रोटी के लिए मोह...

जन्म दिन लघुकथा

 बंग्ले में नाती के जन्म दिवस पर भव्य आयोजन किया गया था शहर के जाने माने सम्मानित रहीश हाथों में गुलदस्ता भेंट लेकर सपरिवार सहित आ रहें थें बेटा धनीराम बहू लछमी बंगले के गेट पर सभी मेहमानों का मुस्कुराते हुए स्वागत कर रहे थे घर के नौकरों को पहले ही आदेश दिया गया था कि मेहमानों कि खातिर दारी में कोई भी कसर नहीं छोड़ी जाए तभी तो नोकर दौड़ दौड़ कर चाय काफी पानी सभी मेहमानों को सर्व कर रहे थे सम्मानित धनाढ्य मेहमानों के आने के बाद जन्म दिन के कैक काटने कि तैयारी हों गई थी थोड़ी ही देर में हाल में हैप्पी बर्थ डे जियो हजारों साल कि ध्वनियां सुनाई दे रही थी साथ ही तालियां बजाने कि आवाज आ रही थी ।  कुछ देर बाद पार्टी चालू हो गई थी मेहमानों के लिए खास तरह कि व्हिस्की मंगाई गई थी जाम पर जाम टकराए जा रहे थे हाल में मध्यम आवाज में रोमांटिक संगीत बज रहा था उस संगीत पर मेहमान थिरक रहें थें स्वादिष्ट रूचिकर भोजन का इंतजाम किया गया था बेटा बहू अपनी धन का भरपूर दिखावा कर रहे थे  परन्तु बेटा बहू शायद भूल गए थे कि घर में बूढ़ी मां भी हैं जो कि विस्तर पर बहुत सारी बीमारी के साथ दो रोटी के लि...