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Showing posts from July, 2022

लॉकडाउन

 घर बंदी के पहली कोरोनावायरस कि लहर को आज भी भूला नहीं पा रहा हूं शायद यह मानव इतिहास का पहला घर जैल था हालांकि हम मानवों ने अपने निजी हितों के लिए जल जंगल जमीन का दोहन किया जमीन के अंदर से गैस खनिज पदार्थ डीजल पेट्रोल कोयला निकाला, समुद्र के पानी को रीसाइक्लिंग मशीन से अपने पीने के लिए तैयार किया , जंगल के हरे भरे लहलहाते पेड़ों को काटकर अपने लिए फर्नीचर सोफ़ा सेट या फिर घर के लिए दरवाजे खिड़कियां या फिर औषधि के लिए इनका उपयोग किया पहाड़ को काटकर हमने सड़क मार्ग के लिए  घर के भराव के लिए ,या फिर किसी सीमेंट फैक्ट्री , साबुन वगैरह के लिए पथरीली चट्टान को काटकर उसका चूर्ण बनाकर उपयोग किया , जिससे पहाड़ लगभग खत्म होने के कगार पर है , हमारे स्वार्थ ने जंगली जानवर जीवों को भूखों रहने के लिए मोहताज कर दिया यही कारण है कि हाथी ,शेर,चीता , तेंदुआ, भालू,बाघ,कभी कभी अपनी सीमा लांघ कर इंसानी बस्तीयों में आ कर इंसान पर आक्रमण कर रहे हैं क्या हम इसमें दोशी नहीं है ??् दूसरी ओर हमने अपने अपने देश कि सीमा कि रक्षा के लिए घातक हथियारों का अविष्कार किया जैसे कि जैविक, रसायनिक आदि जो कि पल भर ...

सौतेली मां

भादों मास कि अंधियारी रात्रि थी आकाश में मेघ नगाड़ा बजा कर धरती पर मोटी मोटी बूंदें बिखेर रहे थे वातावरण में मेंढक झींगुर कि मिलीं जुली आवाजे सुनाई दे रही थी ऐसा लगता था कि जैसे गिटार पर कोई धुन बजा रहे हों या फिर अपने राग से मेघ को धन्यवाद दे रहे हों पर इनके संगीत अलाप में गांव के कुत्ते बाधा उत्पन्न कर रहे थे ऐसे ही समय में रामू अपने एक साल के बेटे के पेट पर हींग का लेप लगा रहा था परन्तु फिर भी बालक रो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्यों रो रहा था कोन सा रोग बालक को परेशान कर रहा था पास में ही रामू कि मां बैंठी हूई थी उनसे बालक का रोना धोना सहन नहीं हो रहा था कमजोर आवाज में बड़बड़ाते हुए कहा था हैं हे भगवान् तूं तो दयालु है बालक पर दया कर फिर भगवान आपका ऐसा क्या बिगाड़ा था जो आपने मेरी बहू को जिसके दो फूल जैसे बच्चे थें उसे हमसे छीन कर अपने पास बुला लिया अब आप ही बताइए भगवान् इनका पालन पोषण कैसे होगा में तो सुखी हुई टहनी हूं पता नहीं कब टूट कर गिर जाऊं कब प्राण देह से निकल जाएं  कब..... हींग के लेप से बालक को आराम मिल गया था वह पिता कि गोद में ही सो गया था शायद उसके पेट ...

मासूम जमाई मर्म स्पर्शी कहानी

  घर दामाद बनना हर किसी के बस बस कि बात नहीं दिल से, दिमाग़, से, मजबूत होना पड़ता है फिर,कभी कभी अपमान भी झेलना पड़ता है वह भी साले,या,सास, ससुर साले कि पत्नी फिर अपनी ख़ुद कि, अर्धांगिनी शेरनी बनकर दहाड़ मारने लगती है कभी कभी तो अपमान के घूंट पानी कि तरह पी कर रहना पड़ता है कुल मिलाकर अपना आत्म सम्मान दांव पर लगा कर बेशर्म होकर ससुराल कि रोटीयां तोड़ने पड़ती है पर राम वरन हालांकि घर जमाई था या यूं कहें कि मजबूर होकर घर जमाई बनना पड़ा था या फिर पत्नी के प्रेम में बंध गया था तभी तो वह अपमान पर अपमान सह कर ससुराल में ही रह रहा था कुल मिलाकर वह मासूम जमाई था या फिर अपने छद्म रूप से यह सब कुछ सह रहा था । रामवरण बेरोजगार शादी शुदा सिविल इंजीनियर था जब उसकी डिग्री का आखिरी साल था तभी उसकी सगाई हो गई थी और फिर डिग्री आते ही शुशील कन्या से विवाह हो गया था जहां रामवरण मध्यम वर्ग परिवार से ताल्लुक रखता था वही उसकी पत्नी बड़े किसान परिवार से ताल्लुक रखती थीं उसके पिता जी का आसपास के पचास गांव में बोलबाला था आखिर क्यों नहीं होता क्योंकि उनके पास सैकड़ों एकड़ जमीन थी फिर बहुत सारी गाएं, भैंस थी...

स्वर्ग से सुंदर घर

   कालोनी में उत्सव जैसा माहोल था ऐसा लगता था कि जैसे ईद , किसमिस,या दीपावली त्यौहार हों चारों ओर चहल पहल थी कालोनी का रोड पर पानी का छिड़काव किया जा रहा था फिर उस पर गुलाब चंपा चमेली गेंदा फूल बिछाएं जा रहे थे खाली मैदान पर पंडाल सजाया गया था लोड स्पीकर से काम करने वाले कालोनी के नव युवा नव युवती को दिशा निर्देश जारी किए जा रहे थे अब आप समझ रहे होंगे कि किसी नेता या अभिनेता का आवागमन हो रहा होगा तब मैं आपको बता दूं आज मास्टर अमृत लाल रिटायर हो रहे हैं साथ ही आज ही उनके बेटे मिस्टर नकुल कामदार का कलेक्टर के पद का चयन का लेटर आया था कुल मिलाकर कालोनी को जहां मास्टर जी के रिटायर्ड होने का दुःख हो रहा था उसका कारण यह था उन्होंने अपने गुरु पद कि गरीमा क़ायम रखी थी गरीब परिवार से छात्र, छात्राओं में कोई भी भेदभाव नहीं किया था सभी को समान दृष्टि से देखा था मास्टरजी गणित व साइंस विषय में निपुण थें न्यूटन जैसे विज्ञानियों के फार्मूले कंठस्थ याद थें यही कारण था कि उनके पढ़ाए हुए शिष्य इंजीनियर, प्रोफेसर, या फिर कुशल बिजनेस मैन थें  वहीं नकुल कामदार का कलेक्टर जैसे पद पर चयन होना ख...

कुशल गृहिणी

रविवार कि सुबह  सूर्य उदय का समय था मिस्टर नरेश मजूमदार फ्लेट कि बालकनी से सूर्य उदय उदय कि अलौकिक आभा को देखकर रोमांचित हो रहें थें गोल गोल मटोल घेरे में विभिन्न रंग जैसे कि जीवन कि दशा दिशा का जीने का निर्देशन कर रहे थे वह भावों में खोए हुए थे कि तभी मिसेज मजूमदार एक चाय बिस्कुट अखबार लें आई थी बालकनी में दो कुर्सियां छोटी सी डाइंग टेबल थी दोनों ही बैठ कर चाय पीने लगे थे व अंग्रेजी भाषा के अखबर  का सम्पादकिय पेज मिस्टर मजूमदार ने  लिया था बाकि का अख़बार मिसेज मजूमदार   पन्ने पलटते हुए खास खास खबरें पड़ रही थी तभी उनकी नज़र विज्ञापन पर पड़ी थी विज्ञापन रो हाऊस बंगलों प्लाट का था जो कि वहुत ही लुभावना था जैसे कि शहर कि प्राइम लोकेशन पर ५२०० रूपए में बुक कराएं आज ही आए पहले आए पहले पाएं सभी बैंक से ऋण सुविधा उपलब्ध हैं आदि । मिसेज मजूमदार ने पति को विज्ञापन दिखाते हुए कहा कि कितनी सुन्दर जगह हैं चारों ओर पहाड़ जंगल तालाब प्रकृति के सानिध्य में सुनिए आज छुट्टी है हम अपना घर खोजने जाएंगे । मिस्टर मजूमदार लेख पढ़ रहे थे जो कि प़कृति से इंसान का छेड़छाड़ पर आधारित था...

सारे जहां की खुशियां

मग्न लाल शाम को झुग्गी आया था टिफिन का थैला के साथ एक कपड़े कि थैली में कुछ सब्जियां थी उसने उसे घरवाली को पकड़ा दी थी फिर वह हाथ मुंह धोने लगा था घरवाली ने सब्जियां निकाल कर देखी थी जिसमें आलू और हरी मिर्च धनिया ही थी उसने मग्न लाल से कहां था टमाटर नहीं लाएं आलू बिना टमाटर के अच्छे नहीं लगते हैं टमाटर से स्वाद बढ़ जाता है ।  टमाटर बहुत ही महंगे हैं कमला अस्सी रुपए किलो खरीदने कि हिम्मत ही नहीं पड़ती है ऐसा करो आलू को उबालकर हरी मिर्च धनिया नमक कि चटनी बना दें स्वाद अपने आप ही बड़ जाएगा  मग्न लाल ने प्रतिउत्तर में कहा था । कमला :-  सब्जी वाला तेल खत्म हो गया था दुकान पर लेने गई थी पोने दो सो रुपए दाम एक किलो का था में एक पांव लेकर आ गई कितना दिन चलेगा वह अपनी ही धुन में बड़बड़ाने लगी थी । मग्न लाल:- मुंह में कुल्ला करते हुए कमला महंगाई दिन पर दिन अमरबेल कि तरह पनप रही हैं यह हमारे जैसे कमजोर वृक्ष को कभी भी हरा भरा नहीं होनी देगी उसने दार्शनिक लहज़े से अपना तर्क दिया था । मग्न लाल दिहाड़ी मजदूर था सारे दिन पसीना वहां कर तीन सो रूपए ही कमा पाता था पहले कमला भी काम पर जाती ...

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दो गज कि दूरी

यूं  सेठ लछमी चंद को रूपयों पैसे कि कोई भी तंगी नहीं थी भगवान का दिया हुआ सब कुछ था दर्जनों  कारे  बंगले थे हजारों  करोड़ रुपए कि (रियल एस्टेट) कम्पनी के मालिक थे  अनेकों शहरों में व्यापार फैला था सेकंडों नोकर चाकर थे पावर इतना कि बढ़े बढ़े मंत्री चाय पीने को आते थे उच्च पदों पर बैठे सरकारी मुलाजिमों से अच्छा यराना था ऐक फ़ोन पर फाइलों में साइन करा लेने का अधिकार रखते थे वो बात अलग थी कि सेठ समय समय पर अपनी यारी नोटों के बंडल भेंट रूप में देकर निभाते रहते थे  खैर पैसे से कैसे पैसे बनाए जाते थे उन्हें हर गुर बखूबी आता था सेठ जी कि उम्र लगभग साठ साल के आसपास कनपटी पर सफेद बाल थुलथुल शरीर गोरे चिट्टे मध्यम कद चेहरे पर तेज पर शरीर में बहुत सारी बिमारियों ने बसेरा कर रखा था जैसे शुगर ब्लेड प्रेशर गैस आदि आदि फिर भी दिन भर भागदौड़ कर रात्रि  दो बजे तक हिसाब किताब में ऊलछे रहते थे यू तो एकाउंट को सम्हालने वाले सी ऐ भी थे पर उनके ही हिसाब किताब को चेक करते थे विश्वास अपने रोम पर भी नहीं था  अर्धांगिनी कभी कभी टोकती तब यू कहकर टरका देते कि बस अब आख़री साल ...

लोक कथा सामाजिक कहानी

             ऐक था राजा उसका ऐक राजकुमार था राज्य में सब कूशल मंगल था ऐक दिन राजा राजकुमार को राज सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गया राजा के जाने के बाद राजकुमार अपनी सूझबूझ से राज्य चलाने लगा था चारो ओर शांति समृद्धि कायम हो रही थी जो कुछ चाटूकारों को अच्छी नही लगती थी  ऐक दिन ऐक गरीब ब्राह्मण राज दरबार में आया था उसे अपनी पुत्री का विवाह करना जा चूकि गरीब होने के कारण धन नहीं था पत्नी के बार बार कहने पर वह आया था पर ब्राह्मण सिद्धांत का पक्का था बिना कुछ दिए हुए भिक्षा भी नहीं लेता था खैर राज दरबार में ऊसका यथोचित सत्कार किया गया था राजकुमार ने आने का कारण पूछा तब ब्राह्मण ने कहा हे राजन मुझे अपनी कन्या का विवाह करना है मेरे पास धन की कमी है अतः मुझे आपसे आर्थिक मदद चाहिए तब राजकुमार ने कहा हे ब्राह्मण आपके लिए रात को खोल देता हूं आपको जितना भी लगे आप ले जा सकते हैं तब ब्राह्मण बोला नहीं नहीं राजन मैं फ्री में किसी से दान भी नहीं लेता मैं आपको एक कागज दे रहा हूं वक्त आने पर इसे पढ़िए गा बहुत काम आएगा खैर ब्राह्मण कागज दे कर धन लेकर अपने घर रवाना ह...

काल गर्ल बैब स्टोरी भाग 07

 उसने चाय बना दी थी दोनों ही नीचे चटाई पर बैठकर चाय कि चुस्कियों लें रहें थें व एक दूसरे को निहार रहे थे कुछ देर बाद विनय कुमार ने कहा था कि आप बुरा नहीं माने तब में आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि मेरी पेंटिंग जो आप देख रहीं हैं वह अधूरी है मैं उस पेंटिंग को आपके सहयोग से ही पूरा कर पाऊंगा जैसे कि गुलाबी शुष्क अधर , उन्नत वक्ष,पतली कमर,कमर वह फिर कुछ देर के लिए नग्न हो सकती है मेरा मतलब.... करूणा यूं तो सैकड़ों बार अलग अलग पूरूसो के साथ नग्न हो चुकी थी लेकिन उसे न जाने क्यों आज शर्म आ रही थी करूणा ने सालीनता से जी नहीं  विनय कुमार को शायद जी नहीं जबाब कि उम्मीद नहीं थी उसका चेहरा उदास हो गया था कुछ सोचने लगा था तभी करूणा ने कहा था कि आज नहीं फिर कभी अच्छा आज आप मेरे साथ मेरे फ्लेट पर चलेंगे सहसा ऊसे याद आया था कि आज तो उसकी होटल ब्लू रोज में फुल नाइट कि बुकिंग फुल सर्विस के साथ थी पैसा भी लाखों मिल रहा था उसने मोबाइल निकाल कर संबोधित पुरूष को तीन दिन बाद मिलने का यू कहकर कि वह महीने से हैं जैसा आप चाहते हैं बैसी सर्विस नहीं दे पाऊंगी इसलिए तीन दिन बाद व्हाट्सएप पर मैसेज भेज दिय...