यूं कोरोनावायरस ने सेठ साहूकारों कि दीवाली फीकी कर दी थी फिर भला दिहाड़ी मजदूरों कि क्या धनतेरस का दिन था कहते हैं इस दिन लक्ष्मी जी का धनाढ्य घर से गरीब घर में पदार्पण होता है या नहीं होता है यह तो आस्था का विषय है या यो कहें कर्म का लेखा जोखा है ऐसा ही गरीब था पेशे से पेंटर बढ़े बढ़े बंगलों में अपने हाथों कि कलां से ठेकेदार के अंडर में काम करता था विभिन्न प्रकार के रंगों को बढ़ी खूबसूरती से बंगलों में उतार देता था वह भी कम समय में ठेकेदार उसकी हुनर का को पहचानता था फिर भी उसे डांट फटकार देता था कि देख यहां पर यह कमी है इस दीवार में धब्बा है आदी आदी कारण यह कि कहीं यह मज़दूरी ज्यादा न मांग लें खैर यह तो हर मजदूर को अपनी हुनर का ठेकेदारों से प्रार्थमिक मिलता था ! गरीबा :- अपने हाथों कि कला से बंग्ले कि दीवार मे रंग भर रहा था तभी ठेकेदार दुःखी राम ने पदार्पण किया बंग्ले में और भी पेंटर काम कर रहे थे दुःखी राम ने चहलकदमी करते हुए पूरे बंग्ले का निरीक्षण किया था फिर गरीबा के पास पहुंच कर वार्तालाप करने लगा था ...
अपनी सी कहानियां का पिटारा