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Showing posts from March, 2021

"हेराफेरी" कविता चितंन.

आत्मा ने मुझसे कहां  तुझे परमात्मा ने क्यों भेजा पता है तुझे तुने कितने कितने वादे किए ?? मे तुनक कर बोला  हा मुझे मालूम है  ऊस समय मां के पेट मे था । पेशाब मे लथपथ था  गर्भ गृह मे थे बहुत सारे कीड़े जो थें अल बेले  बिन नख दंत के  काटते थें  बहुत दर्द होता था  पर किसी से कह नहीं सकता था ? मज़बूरी थी  मुक्ति चाहिए थी  इसलिए कर दिए होगे वादे  अजब गजब निराले  परमात्मा को सारे  पर अब तो मे  मजबूर नहीं  कोई जेल गृभगृह जैसी नही ? न ही काटते है टिंडे  न ही पडा हूँ  पेशाब टट्टी पर  में आजाद हूं उड़ता हूं मस्त  गगन मे पंछी कि तरह  घूमता हूं हवाई जहाज पर  जाता हू यूरोप  अमेरिका पाकिस्तान बंगाल देश और आस्ट्रेलिया  इंग्लैंड करता हू डांस  जवान मधुबाला से  मधुशाला पहुंच कर पिता हूं वियर और शराब फिर पहुंच जाता है मस्तिष्क सात समुद्र पार सात लोक  चांद मंगल गृह पर  जहां मुझे खोजना है नया बसेरा  करूगां खेती-बाड़ी उगाएं गा अनाज  जो भरेगा पेट लगाऊंगा बाग  फल...

"हेराफेरी" कविता चितंन.

आत्मा ने मुझसे कहां  तुझे परमात्मा ने क्यों भेजा पता है तुझे तुने कितने कितने वादे किए ?? मे तुनक कर बोला  हा मुझे मालूम है  ऊस समय मां के पेट मे था । पेशाब मे लथपथ था  गर्भ गृह मे थे बहुत सारे कीड़े जो थें अल बेले  बिन नख दंत के  काटते थें  बहुत दर्द होता था  पर किसी से कह नहीं सकता था ? मज़बूरी थी  मुक्ति चाहिए थी  इसलिए कर दिए होगे वादे  अजब गजब निराले  परमात्मा को सारे  पर अब तो मे  मजबूर नहीं  कोई जेल गृभगृह जैसी नही ? न ही काटते है टिंडे  न ही पडा हूँ  पेशाब टट्टी पर  में आजाद हूं उड़ता हूं मस्त  गगन मे पंछी कि तरह  घूमता हूं हवाई जहाज पर  जाता हू यूरोप  अमेरिका पाकिस्तान बंगाल देश और आस्ट्रेलिया  इंग्लैंड करता हू डांस  जवान मधुबाला से  मधुशाला पहुंच कर पिता हूं वियर और शराब फिर पहुंच जाता है मस्तिष्क सात समुद्र पार सात लोक  चांद मंगल गृह पर  जहां मुझे खोजना है नया बसेरा  करूगां खेती-बाड़ी उगाएं गा अनाज  जो भरेगा पेट लगाऊंगा बाग  फल...

2021 कोविड 19

 मे ऐक वयापारी  ऊधार लेकर शुरू किया  बिजनेस  कोबिड 19 के लोक डाऊन के बाद  चालू किया काम  बिन सोचे समझे ले लिया जी ऐस टी नमबर  अब हर महीने रिटर्न भरने का  रहता था सिरदर्द  खैर प़ाईवेट कंपनी मे लिया था काम  जहां काम करना हो गया है हराम  भाई साहब कुछ अनपढ़ जाहिल  बन गये सुपरवाइजर  कुछ है पढे लिखे इंजीनियर जो चलते है ऐक घंमड लेकर  समझते है कंपनी मेरे बाप कि है. मेरे दादा नाना कि है. ठेकेदार है अपना गुलाम  जिसका करना है काम तमाम   पैसा  कमाकर नहीं जाऐ  कसम से करने नहीँ दूगा काम  निकालूँगा कमिया  नही दूगा पूर कारड  नहीं होगा पैमंट  रहेगा बैचैन । यह तो कंपनी के  सटाफ कि बात है  ठेकेदार का काम तमाम है. लेवर रोज छेड़छाड़ कर  दबी जुवान से कहती है  भाई साहब  पैमंट कब मिलेगा  मेरा भी घर परिवार है  ठेकेदार बढे विश्वास से  आज कल कह कह टाल रहा है  पर ऊसे है पता  मे छूठ बोल रहा हू । जी ऐस टी  विभाग से टेलीफोन आता है  भाई आप का रिटर्न...