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Showing posts from April, 2022

काला गुलाब काव्य संग्रह भाग ६

ओ मेरे आत्मिय गुलाब  आज तुम्हरा  माली नजर  आया था हमें देखते ही मुस्कुराता तेरा रखवाला  मुझे बहुत बहुत भाया  कि तेरी कलम मुझे देगा  उसने था बताया  आज नहीं मौसम  पर विन कहें  विन वोलै  तुम्हारे घर लाएगा  या तू अपने आप मेरे  घर लाएगा  या तू अपने आप मेरे साथ आएगा  बता तू मुझे  कब तक ऊलझाएगा । ओ मेरे आत्मिय गुलाब  तुम्हारे अंदर का पराग  केन्द्र गहरा नजर आता है  एक के बाद दूसरा  दूसरे के बाद तीसरा  तीसरे के बाद चोथा  रहस्य नजर आता है  उसकि रचना देख  उसी का रूप तुझ में देख  मन ठगा सा रह जाता है  जब तू जग से निराला  लाल हो या काला  विश्व को नव उत्सव नव संदेश  देता नजर आता है । ओ मेरे आत्मिय गुलाब  जब तुम शुभकामनाएं वन  मेरे मित्र कि वेटी कि शादी में  निमंत्रण पत्र के अन्दर आये  मुझे देख मुस्कराए कुछ सकुचाए  वोले क्या दान दोगे तुम  क्या संदेश देना चाहेंगे  उसकि सशुराल वाले को  या फिर उसके पति को  कि दहेज लेना और ...