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कर्ज से मुक्ति

यूं  मुक्ति के अनेकों अर्थ है यानी मुक्त होने के जैसे कि कर्ज से मुक्ति,मन कि चिंता से मुक्ति, ,जीवन से मुक्ति इत्यादि पर ठाकुर साहब उस थकाऊ नौकरी से मुक्ति पाना चाहते थे जहां पर समय का कोई भी हिसाब किताब नहीं था , जहां का स्टाफ के कुछ सदस्यों को इंसान से कोई भी लेना देना नहीं था उसका कारण यह था कि बे कंपनी कि तरफ से पड़  लिखे इंजीनियर थे यानी किसी के पास सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा था या फिर डिग्री पर भले ही धरातल पर काम करने में बे सब जीरो थे पर कंपनी के अफसर उन्हें ही ज्यादा इज्जत देते थे  उन्हें ही ज्यादा पावर दिए गए थे जैसे कि सुपरवाइजर फोर मेन से ज्यादा से काम लेना मजदूरों को इंसान नहीं समझना , ठेकेदार से कमिशन लेंना आदि ठाकुर साहब कंट्रक्शन कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर थें उनका नाम नरेंद्र सिंह ठाकुर था बड़े ही सरल हृदय व दयालु थे साथ ही मेहनत कश कर्मठ, ईमानदार इसी के कारण वह मालिक लोगों के खासमखास थें उन्हें बहुत सारी जिम्मेदारी दी गई थी जैसे कि मटेरियल पर नजर रखना उसकी क्वालिटी चेक करना साइट कि अन्य व्यवस्थाएं फिर कंट्रक्शन के हर आइटम कि क्वालिटी कंट्रोल करना इत्याद...

उत्सव सामाजिक कहानी


यूं तो देशभर में हर सप्ताह हर महीने तीज त्यौहार का उत्सव मनाने का भरपूर अवसर रहता है अलग अलग धर्म के अनुयाई अपनी हैसियत अनुसार उत्सव मनाते हैं परन्तु अब तलाक उत्सव कि तारीख़ भी कैलेंडर में फिक्स कर दी है इस उत्सव में शामिल होने के लिए तलाकशुदा पति दूर दूर से सफ़र कर भोपाल में आयोजित सेमिनार में शामिल हों रहें थें उन्हें अपने दुःख दर्द पत्नियों से प्रताड़ित कैसे हुए फिर तलाक लेने के लिए के लिए अदालत में कितने चक्कर लगाने पड़े कैसे कैसे तर्क वितर्क हुए कितनी धनराशि देकर तलाक मिला उस विषय पर व्याख्यान देने का भरपूर अवसर था या फिर एक दूसरे को पत्नियों कि बेवफाई को साझा कर अपने दुःख व्यक्त करने का मौका था तभी तो तलाक उत्सव में हर्ष उल्लास से तलाक शुदा पुरुष इकठ्ठा हो रहें थें ।
मिस्टर सुनील कुमार माथुर देश के जानें मानें गुप्त रोग विशेषज्ञ थें अखबारों में उनके विज्ञापन अक्सर पड़ने को मिल जाते थे जिसका शीर्षक कुछ इस प्रकार का रहता था परेशान गुप्त योन रोगी का चमत्कारिक इलाज आइए मिलिए आपका नाम गुप्त रखा जाएगा मेरे इलाज़ से पाएं घोड़े जैसी ताकत बिना रुके थके विवाहित जीवन का आनंद पाएं आपका पार्टनर आपके साथ सारे जीवन हंसी खुशी से व्यतीत करें तलाक का कभी भी सोचें भी नहीं आदि 
मिस्टर सुनील कुमार माथुर यौन रोग विशेषज्ञ थें आमदनी भी अच्छी थी पाश कालौनी में आलीशान बंगला था लग्जरी कारें थीं नोकर चाकर थें इतना सब कुछ होने के बाद भी मिसेज माथुर ने उन्हें तलाक दे दिया था उनके तलाक अखबारों में चर्चा का विषय बना हुआ था कुछ लोगों का मानना था कि डाक्टर साहब का सहकर्मी महिलाओं से अफेयर था तब कुछ लोगों का मानना था अजी विवाह को दस साल हों गये थें फिर भी मिसेज माथुर को वह संतान सुख नहीं दें पाएं थें खैर यह तो लोगों कि अपनी राय थी परन्तु मिस्टर सुनील कुमार माथुर को पत्नी का मझधार में किनारा कर लेने से बढ़ा दुःख पहुंचा था उनकी शहर में बढ़ी बदनामी हुई थी क्लिनिक में मरीज़ भी कम आने लगें थें एक दो मरीज ने तो यहां तक कह दिया था कि आप  खुद ही यौन रोग से ग्रस्त है इसलिए आपकी पत्नी आप को तलाक दे चूंकि थीं ऐसे में बे मन से टूट गये थें हालांकि विवाह के लिए अनेकों रूपवती लड़कियों के माता पिता का प्रस्ताव आया था परन्तु डाक्टर साहब हां नहीं क ह रहे थे कारण जो भी हो परन्तु वह तलाक उत्सव में अपने ह़दय के घाव को सभी को बताना चाहतें थें इसलिए वह जलसे में शरीक होने पहुंच गए थे ।

तलाक शुदा कमेटी ने बहुत बड़ा मैरिज गार्डन बुक किया हुआ था गार्डन के बाहर सैकड़ों कारों के पार्क करने के लिए पर्याप्त जगह थी गार्डन के अंदर टैट लगाया गया था सामने स्टेज तैयार किया गया था मिडिया के मित्रो कि कार्यक्रम के कवरेज कि व्यवस्था कि गयी थी पदाधिकारी चारों तरफ कि व्यवस्था सम्हाल रहें थें एक और भोजन तैयार हो रहा था तय समय अनुसार  तलाक़ शुदा पुरुषो से प्रागंण भर गया था कुछ लोगों के चेहरे पर दर्द तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहे थे वहीं कुछ लोग खुश थे मंच पर मौजूद उद्घोष ने सभी का धन्यवाद कहां था फिर कुछ सताए हुए पतिदेव के नामों का एलाउंस किया गया था पहले आने वाले सज्जन जिनकी मोंटी तोंद थी मध्यम कद था चेहरे पर चपटी नाक थी जो कि सांवले चेहरे को ज्यादा ही कुरूप बना रहीं थीं वह सरकार के बढ़े ओहदे पर तैनात थे भीड़ पर सरसरी निगाह डालकर जेब से रूमाल निकाल कर उन्होंने माथे का पसीना पोंछा था फिर कहा में प्रेम नाथ प़सासनिक सेवा में बतोर कलेक्टर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं मेरी शादी अरेंज मैरिज से हुई थी मेरे ओहदे को देखकर अत्यंत रूपवती स्त्री ने मुझसे व्याह किया था यकिन मानिए मैंने दहेज़ में कुछ भी नहीं लिया था कारण में दहेज़ प्रथा का घोर विरोध करता था और करता रहूंगा मेरे पास भगवान का दिया हुआ सब कुछ पहले से ही था मेरे माता पिता जन्मजात अमीर थें हमारे बहुत सारे खेत खलिहान बंग्ले फैक्टी पहले से ही थी फिर मैं भी आप सब लोगों कि कृपा से बढ़े पद पर कार्यरत था परिचय देकर उन्होंने लम्बी सांस ली थी आधा गिलास पानी हलक में उतार लिया था फिर अपनी दशा का बयां किया जैसा कि मेरी शादी हो गई थी मेरी जवान रूपमती दुल्हन सुहाग सेज पर घूंघट में बैठी हुई थी मैंने उसका घूंघट उठाया था उसके सौन्दर्य कि प्रशंसा करते हुए में उसे अपनी बाहों में भरकर प्यार करना चाहता था परन्तु उसने में पीरियड से हूं आज नहीं फिर कभी बहाना बना कर मुझे टरका दिया था हालांकि कुछ दिन बाद मुझे अपने देह सुख मिला था ।
उन्होंने फिर से रूमाल निकाल कर पसीना से नहाएं हुए माथा को पोंछा था फिर लम्बी सांस लेकर वह मेरे पास सिर्फ व सिर्फ एक महीने ही रहकर अपने माता पिता के पास पहुंच गयी थी जब मैं उसे लेने उसके मायके गया तब वह यह कहते हुए कि आप कुरूप हो में आपके साथ नहीं रह सकतीं मेरी उससे लम्बी बहस हुई थी फिर परिणाम स्वरूप उसने मुझ पर मुकदमा दहेज़ एक्ट का पुलिस में दर्ज करा दिया था जिसमें पचास लाख रुपए कार न देने का जिक्र किया गया था मेरी साख नौकरी ख़तरे में पड़ी थी फिर हमने समाज कि पंचायत जोड़ी थी जो कि एक बंगला पचास लाख रुपए कार  देकर हाथोंहाथ कानूनी रूप से तलाक लिया था बाद में पता चला कि वह टपोरी कार मोटरसाइकिल के पंचर बनाने वाले के साथ पहले से ही कनेक्ट थी ।
कुछ लोगों ने अपनी प्रताड़ना शोषण को दर्द भरी आवाज से दुखड़ा सुनाया था फिर मिस्टर सुनील कुमार माथुर को आमंत्रित किया गया था उन्होंने अपनी दास्तां कुछ इस प्रकार से सुनाई थी जैसे कि में गुप्त योन रोगी का चमत्कारिक इलाज करता हूं मेरे मरीजों को संतान सुख विवाहिता जीवन का चरमोत्कर्ष आनंद मिल रहा है कुछ लोगों के तों मेरे इलाज़ तलाक रूक गये थें पर अफसोस मेरा तलाक हो गया मेरी पत्नी भी डाक्टर थीं अच्छे खानदान से थी समझदार व अप्सरा जैसी खुबसूरती थीं उसकी खूबसूरती के सामने रूपहर्ले पर्दे कि अदाकारा भी फेल थी में बहुत प्यार करता था वह मेरी आत्मा कि गहराई में हमेशा रहती थी हमारा विवाह बहुत धूमधाम से संपन्न हुआ था हम हनीमून मनाने के लिए स्विट्जरलैंड गये थें हमारा सुखी दाम्पत्य जीवन तीन साल का धा फिर वह मुझसे बेवजह लड़ने लगीं थी जैसे कि विस्तर पर कुछ न कुछ .. एक दिन उसने मुझसे तलाक लेने का कहा था वह रूठकर अपने माता पिता के पास पहुंच गयी थी फिर.... एक दिन मेरे घर पर पुलिस आ गई थी मेरे उपर  अननेचुरल सैक्स करने का मुकदमा दर्ज कराया था पुलिस मुझे खोज रहीं थीं और में छुप छुपकर एडवोकेट तलाश रहा था ताकि कैसे भी करके में अपनी जमानत अर्जी दाखिल कर सकूं हालांकि मेरे बेदाग चरित्र को देखकर माननीय अदालत ने मुझे अग्रिम जमानत दे दी थी में मेरे माता पिता बहुत बदनाम हों गये थें में अन्दर बाहर से टूट कर बिखरने लगा था कभी कभी सोचता नारी तों ममतामई होती है नारी तों कोमल हृदय होती है मेरी मां भी तो ऐक पत्नी मां थी  वह भी तो उच्च शिक्षण संस्थान से आई थी फिर भी उन्होंने परिवार के प्रति ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया था ।
 एक दिन उसकि और से समझौता का प्रस्ताव आया था एक करोड़ रुपए  फ्लेट  तलाक कि मांग कि थी मजबूरी में मुझे उसका प़सताव मानना पड़ा था तलाक के बाद पता चला कि जो उसके क्लिनिक में वार्ड बॉय था उसके साथ वह लिव इन रिलेशनशिप में रह रही हैं यह सब कहते हुए उनकी आंखों से अश्रु धारा वह निकलीं थी फिर उन्होंने कहां था ऐसी पत्नियों पर समाज में बहस होना चाहिए साथ ही कानून बनना चाहिए ।
तलाक उत्सव नाच गा कर भोजन कर समाप्त हो गया था ।







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दो गज कि दूरी

यूं  सेठ लछमी चंद को रूपयों पैसे कि कोई भी तंगी नहीं थी भगवान का दिया हुआ सब कुछ था दर्जनों  कारे  बंगले थे हजारों  करोड़ रुपए कि (रियल एस्टेट) कम्पनी के मालिक थे  अनेकों शहरों में व्यापार फैला था सेकंडों नोकर चाकर थे पावर इतना कि बढ़े बढ़े मंत्री चाय पीने को आते थे उच्च पदों पर बैठे सरकारी मुलाजिमों से अच्छा यराना था ऐक फ़ोन पर फाइलों में साइन करा लेने का अधिकार रखते थे वो बात अलग थी कि सेठ समय समय पर अपनी यारी नोटों के बंडल भेंट रूप में देकर निभाते रहते थे  खैर पैसे से कैसे पैसे बनाए जाते थे उन्हें हर गुर बखूबी आता था सेठ जी कि उम्र लगभग साठ साल के आसपास कनपटी पर सफेद बाल थुलथुल शरीर गोरे चिट्टे मध्यम कद चेहरे पर तेज पर शरीर में बहुत सारी बिमारियों ने बसेरा कर रखा था जैसे शुगर ब्लेड प्रेशर गैस आदि आदि फिर भी दिन भर भागदौड़ कर रात्रि  दो बजे तक हिसाब किताब में ऊलछे रहते थे यू तो एकाउंट को सम्हालने वाले सी ऐ भी थे पर उनके ही हिसाब किताब को चेक करते थे विश्वास अपने रोम पर भी नहीं था  अर्धांगिनी कभी कभी टोकती तब यू कहकर टरका देते कि बस अब आख़री साल ...

पति-पत्नी और वो किस्सा

             ऐक था राजा उसका ऐक राजकुमार था राज्य में सब कूशल मंगल था ऐक दिन राजा राजकुमार को राज सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गया राजा के जाने के बाद राजकुमार अपनी सूझबूझ से राज्य चलाने लगा था चारो ओर शांति समृद्धि कायम हो रही थी जो कुछ चाटूकारों को अच्छी नही लगती थी  ऐक दिन ऐक गरीब ब्राह्मण राज दरबार में आया था उसे अपनी पुत्री का विवाह करना जा चूकि गरीब होने के कारण धन नहीं था पत्नी के बार बार कहने पर वह आया था पर ब्राह्मण सिद्धांत का पक्का था बिना कुछ दिए हुए भिक्षा भी नहीं लेता था खैर राज दरबार में ऊसका यथोचित सत्कार किया गया था राजकुमार ने आने का कारण पूछा तब ब्राह्मण ने कहा हे राजन मुझे अपनी कन्या का विवाह करना है मेरे पास धन की कमी है अतः मुझे आपसे आर्थिक मदद चाहिए तब राजकुमार ने कहा हे ब्राह्मण आपके लिए रात को खोल देता हूं आपको जितना भी लगे आप ले जा सकते हैं तब ब्राह्मण बोला नहीं नहीं राजन मैं फ्री में किसी से दान भी नहीं लेता मैं आपको एक कागज दे रहा हूं वक्त आने पर इसे पढ़िए गा बहुत काम आएगा खैर ब्राह्मण कागज दे कर धन लेकर अपने घर रवाना ह...

बड़ा दिन कविता

 आज तो बड़ा दिन था  पर पता नहीं चला बिना हलचल के ही गुजर गया रोज कि भाती सूरज उषा के साथ फाग खेलता आया संध्या के साथ आंख मिचौली करता चला गया चतुर्थी का चंद्रमा उभरा अपना शीतल प्रकाश बिखेर चल दिया तारों कि बारात आकाश में उतर मोन दर्शक बन चहुं ओर बिखर गई रोज कि भाती लोगों कि भीड़ अपना अपना कर्म कर सो गई पंछियों के समूह प्रभात के साथ कलरव का गान कर संध्या आते गुनगुनाते चहचहाते पंखों को फड़फड़ाते घोंसलों में चलें गये  हर दिन बड़ा दिन ऐसा कहते हमें समझाते गये।।

दलदल एक युवा लड़के कि कहानी

वह एक वर्षांत कि रात्रि थी मेघ गर्जन करते हुए कड़कती बिजली के साथ घनघोर वर्षा कर रहे थे ऐसे ही रात्रि में परेश होटल के कमरे में एक युवा शादी शुदा महिला के साथ लिपटा हुआ था  महिला के कठोर नग्न स्तनों का नुकिला हिस्सा उसकी छाती पर गढ़ रहा था वातावरण में गर्म सांसें के साथ तेज सिसकारियां निकल रही थी सांगवान का डबल बैड पलंग पर मोंटे मोंटे गद्दे कांप रहे थे पलंग का शायद किसी हिस्से का नट बोल्ट ढीला था तभी तो कि कुछ चरमरा ने कि आवाज आ रही थी  साथ ही महिला के मुख से और तेज हा ओर तेज शाबाश ऐसे ही ... .. आह आह सी सी बस बस अब नहीं छोड़ो टांग दर्द  कर रही है बस बस  पर परेश  धक्के पर धक्का दे रहा था फिर वह भी थम गया था अपनी उखड़ी सांसों के साथ चूंकि परेश पुरूष वैश्या था उसकी अमीर हर उम्र कि महिला थी वह इस धंधे में नया नया आया था  पर जल्दी ही अमीर महिलाओं के बीच फेमस हो गया था उसका कारण था उसका सुंदर सुडौल शरीर और बात करने का सभ्य।  ढग फिर वह अपने काम को पूरी इमानदारी से निर्वाह करता था मतलब उसकी ग़ाहक को किसी भी प्रकार कि शिक़ायत नहीं रहती थी । खैर सांसें थमते ही ...

काल गर्ल बैब स्टोरी भाग 07

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शब्दों का व्यापार लघु कविता

 अब तो बस शब्दों का व्यापार है। सत्य असत्य का शब्द ही आधार है।। शब्दों से भरी हवाएं चारों ओर वह रही है शब्दों से भरे अखबारों कि रद्दी बिक रही है शब्दों से न जाने कितने वादे किए जाते हैं पूरे न किए तब शब्द ही माफी मांगते है शब्दों को ओढ़ अनेकों प्रतिभाएं चल रही है कर्म से नाता तोड फलफूल रही है  शब्दों से लोग अपनी योग्यता बताते हैं दोस्त अपनी दोस्ती शब्दों से आगे बढ़ाते हैं और तो और शब्दों के बल पर प्यार हो जाता है इन्हीं शब्दों से नवयुवक नवयुवती का संसार वस जाता है शब्दों कि संवेदना न जाने कितने को जोड़े हैं  शब्दों कि बरसात न जाने कितने को तोड़ें है शब्दों के बल पर नेता अभिनेता रोजीरोटी धन कमाते हैं पर कवि लेखक शब्दों को लिखकर बेवकूफ कहलाते हैं नेता अभिनेता दो शब्दों को कह गृहप्रवेश दुकान का उद्घाटन करते हैं भाईसाहब दुनिया शब्दों के घेरे में चल रही है। आत्मा को परमात्मा से दूर कर तेरा मेरा संजोए हुए है और तो और धर्म भी शब्दों में कैद हैं  कुछ पाखंडी हर धर्म शास्त्री शब्दों को तोल कर दुकान चला रहे हैं  शब्दों को चांदी विन शब्दों को सोना कहा जाता है परन्तु सोना छो...