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अवैध संबंध कहानी

 सरिता किचन में काम कर रही थी साथ ही वह कोई गीत गुनगुना रही थी शायद आज वह खुश थी कारण आज उसकी शादी कि पांचवीं सालगिरह थी पांच साल कैसे व्यतीत हुए पता भी नहीं चला क्यों कि उनके बीच में विश्वास ऐक दूसरे के लिए समर्पण कि मजबूत जो दीवार थी  दोनों कामकाजी थे सरिता बैंक मैनेजर थी वही पति अविनाश सिविल इजीनियर नामी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर था वह गुन गुना रही थी तभी सरिता जल्दी करो मेरी मीटिंग है और तुम्हें भी छोड़ना हैं अच्छा शाम को होटल में छोटी सी पार्टी रखीं हैं तुम चाहो तब अपनी सहेलियों को भी बुला लेना। सरिता ने जल्दी जल्दी किचन का काम खत्म किया था फिर दोनों का लंचबॉक्स तैयार कर जी चलिए कहां था कार सड़क पर तेज गति से दौड़ रही थी सरिता सालगिरह पर तुम्हें क्या उपहार दूं अविनाश ने प्यार से कहा  मेरा सबसे बड़ा उपहार तो आप है मुझे कुछ नहीं चाहिए बस हम हमेशा ऐसे ही खुश रहें सरिता ने मुस्कुराते हुए कहा था कुछ हल्की सी मजाक करते हुए कब बैंक पहुंच गए पता ही नहीं चला देखो शाम को पार्टी है तैयार रहना में समय पर घर आ जाऊंगा फिर होटल चलेंगे अच्छा वाय कहकर अविनाश चलें गय...

अवैध संबंध कहानी


 सरिता किचन में काम कर रही थी साथ ही वह कोई गीत गुनगुना रही थी शायद आज वह खुश थी कारण आज उसकी शादी कि पांचवीं सालगिरह थी पांच साल कैसे व्यतीत हुए पता भी नहीं चला क्यों कि उनके बीच में विश्वास ऐक दूसरे के लिए समर्पण कि मजबूत जो दीवार थी  दोनों कामकाजी थे सरिता बैंक मैनेजर थी वही पति अविनाश सिविल इजीनियर नामी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर था वह गुन गुना रही थी तभी सरिता जल्दी करो मेरी मीटिंग है और तुम्हें भी छोड़ना हैं अच्छा शाम को होटल में छोटी सी पार्टी रखीं हैं तुम चाहो तब अपनी सहेलियों को भी बुला लेना।

सरिता ने जल्दी जल्दी किचन का काम खत्म किया था फिर दोनों का लंचबॉक्स तैयार कर जी चलिए कहां था कार सड़क पर तेज गति से दौड़ रही थी सरिता सालगिरह पर तुम्हें क्या उपहार दूं अविनाश ने प्यार से कहा 

मेरा सबसे बड़ा उपहार तो आप है मुझे कुछ नहीं चाहिए बस हम हमेशा ऐसे ही खुश रहें सरिता ने मुस्कुराते हुए कहा था कुछ हल्की सी मजाक करते हुए कब बैंक पहुंच गए पता ही नहीं चला देखो शाम को पार्टी है तैयार रहना में समय पर घर आ जाऊंगा फिर होटल चलेंगे अच्छा वाय कहकर अविनाश चलें गये थे।

सालगिरह पार्टी में अविनाश के दोस्त थे और सरिता कि खास सहेलियां थी लेकिन उनके बीच अविनाश कि कंपनी का मालिक सेठ लछ्मी चंद्र भी था खूबसूरत जवान लम्बा कद गोरा रंग उसके व्यक्तित्व पर चार चांद लगा रहा था सरिता यह मेरे मालिक मिस्टर लछ्मी चंद्र और यह मेरी जीवन संगिनी सरिता यह बैंक मैनेजर हैं परिचय कराया था सेठ लछ्मी चंद्र ने दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार कहा था ओह आप से मिलना होगा क्योंकि मुझे अगले प्रोजेक्ट के लिए कर्ज कि जरूरत है मैं चाहता हूं कि आप के बैंक से ही लूं 

जी बिल्कुल आप आइए आप का स्वागत है सरिता ने मुस्कुराते हुए बोला था 

स्टेज पर मधुर संगीत कि धुन बज रहीं थीं जोड़े डांस कर रहे थे कुछ तो हाथों में जाम लेकर नाच रहे थे कुछ एक दूसरे कि बाहों में कपल डांस कर रहे थे सरिता और अविनाश भी नाच रहे थे तभी सेठ लछ्मी चंद्र मिसेज अविनाश क्या मैं आप के साथ नाच सकता हूं सरिता के जबाब देने के पहले जी बिल्कुल अविनाश ने कहा था सरिता और सेठ लछ्मी चंद्र स्टेज पर थिरक रहे थे सेठ लछ्मी चंद्र ने धीरे से फुसफुसाते हुए कहा कि आप बहुत सुन्दर है जी शुक्रिया सरिता ने कहा 

तब मिलते हैं 

सेठ लछ्मी चंद्र का लोन पास हों गया था अब दोनों ही फोन पर अक्सर बातें करने लगे थे कभी कभी भाषा कि मर्यादा से बाहर जाकर हंसी मजाक होने लगी थी ऐक दिन सेठ लछ्मी चंद्र ने कहा कि सरिता भोपाल में मेरा नया प्रोजेक्ट आया है अगले हफ्ते उसकी ओपनिंग है दूसरा में अविनाश का ट्रांसफर कर रहा हूं क्या आप अकेली रह पाएगी 

तब सरिता ने कहा मुश्किल है लेकिन काम तो करना ही होगा देखिए यह पैसा का युग है और काम करने से ही पैसा आएगा जी बिल्कुल सही सेठ लछ्मी चंद्र ने ही ही ही करके जबाब दिया था 

हालांकि कभी कभी सरिता मन ही मन विचार चिंतन करती क्या वह बहकने लगी है क्या वह लछ्मी चंद्र कि और खिंचने लगी है क्या अविनाश के भोलेपन का फायदा उठाने का सोच रहीं हैं लेकिन उसकी देह कुछ अनमोल नया पानें के लिए उसे उकसा रही थी कुछ और ..... उसकी तनख्वाह अच्छी थी खुद का घर था कार थी फिर भी वह बहकने लगी थी 

भारतीय संस्कृति में ब्याह सामाजिक व्यवस्था है लेकिन आधुनिक समय में पति-पत्नी एक-दूसरे के भरोसा को तोड़कर कुछ नया पानें कि कोशिश करते हैं परिणाम स्वरूप उनके तलाक़ हो जाते हैं कुछ तो अवसाद में जाकर अपना पूरा जीवन नर्क बना लेते हैं और उनके इस कृत्य को बच्चों को भोगना पड़ता है पूरा परिवार बिखर जाता है ।

अविनाश नये प्रोजेक्ट पर पूरी मेहनत से काम करने लगा था भोपाल में ही वह रहने लगा था सप्ताह में एक दिन के लिए इन्दौर आता फिर वापस चला जाता था।

फोन पर सेठ लछ्मी चंद्र सरिता कि बात चल रही थी सेठ लछ्मी चंद्र ने कहा सरिता आप अगर हां कहे तब आज रात हम मिलते हैं यकिन मानिए आप को खुश कर दूंगा कुछ देर सोचने के बाद आप को किसने मना किया आप मेरे घर आइए में इंतजार करूंगी लेकिन ध्यान रखना में सार्वजनिक जीवन में गोपनीयता का बहुत सख्ती से पालन करतीं हूं और आप को मालूम है कि मैं ब्याहता हूं मैं अपने पति से बहुत प्यार करतीं हूं लेकिन चूंकि आप का व्यवहार मुझे अच्छा लगता है इसलिए मैं हां कह रहीं हूं अच्छा में खुद आप के लिए भोजन तैयार करूंगी साथ में खाना खाएंगे और हां आप चाहें तब बियर ले आना।

सरिता चूंकि बंगाल से ताल्लुक रखती थी और बंगाल में मछली कि रेसीपी प्रसिद्ध है उसने ताजी मछली तैयार कि थी साथ ही चावल फ

सावन का महिना था इन्दौर शहर में रिमझिम रिमझिम बारिश हो रही थी कुछ सड़कों के गड्ढे मे पानी भरा हुआ था सेठ लछ्मी चंद्र सावधान होकर कार डाइविंग कर रहा था महात्मा गांधी पलासिया रोड से आगे जाकर सुपर कारीडोर पर पहुंच कर पता पूछा था फिर घर पहुंच गया सरिता ने अविनाश कि मनपसंद पोशाक पहनी थी जिसमें वह बहुत सुंदर लग रही थी चेहरे पर पाउडर और ओठों पर खास कलर कि लिपस्टिक लगाई थी साथ ही पारदर्शी कपड़े पहने थे जिससे उसका योवन झलक रहा था उसने मुस्कुराते हुए सेठ लछ्मी चंद्र का स्वागत किया था दोनों गले मिले थे 

सेठ लछ्मी चंद्र आप को क्या उपहार दूं कोई कार फ्लेट या फिर कुछ और 

सरिता ने मुस्कुराते हुए कहा था मुझे कुछ नहीं चाहिए आप हमारे पास आए यहीं मेरे लिए उपहार  हैं 

सरिता अपनी मर्यादा से बाहर निकल कर सेठ लछ्मी चंद्र कि बाहों में सिमट कर कुछ नया सुख खोज रही थी कुछ देर तक वह आकाश में उड़ रही थी कुछ देर उसे असीम आनन्द कि अनुभूति हो रही थी 

कहते हैं संभोग स्वस्थ तन मन के लिए जरूरी है कुछ पलों के लिए संभोग से समाधि कि और सृष्टि के सभी प्राणी पहुंच जाते हैं ठीक है लेकिन समाज ने कुछ इस तरह के सुख के लिए नियम कानून बनाए है विवाह बंधन के साथ जिन्हें पति-पत्नी को सख्ती से पालन करना पड़ता है लेकिन सरिता सब कुछ भूलकर पतित हो गई थी अब वह हर रात कभी होटल में कभी घर पर सेठ लछ्मी चंद्र के आगोश में समां रही थी ।

अविनाश हर सप्ताह छुट्टी पर घर आता था लेकिन उसे सरिता का व्यवहार बदला बदला सा लगता था कहते हैं इश्क और मुश्क छुपाए नहीं छुपते और दीवारों के भी कान होते हैं कुछ पड़ोसियों ने अविनाश तेरे घर तेरा मालिक घंटों रूकता है जरा सावधान रहना देख कहीं तेरी बीवी का उसके साथ कोई चक्कर तो नहीं भाई तूं किसी दिन एकाएक घर आ जाना सच्चाई पता चल जाएगी ।

भादों मास कि अंधेरे भरी रात थी आसमान में बादल छाए हुए थे हल्की हल्की रिमझिम बारिश हो रही थी कहीं दूर बिजली चमक रही थी उसी के साथ जोरदार बादल गरजने लगे थे ऐसे ही मौसम में अविनाश घर आया था घंटी बार बार बजाने के बाद सरिता ने दरवाजा खोला था उसके बाल बिखरे हुए थे कपड़े भी अस्त-व्यस्त दिखाई दे रहे थे गाल पर हल्के हल्के दांत के निशान दिखाई दे रहे थे अविनाश को एकाएक देख कर वह हड़बड़ा गई थी अविनाश तेजी से बेडरूम में गया था वहां सेठ लछ्मी चंद्र अर्ध-नग्न अवस्था में था 

सब कुछ समझने के बाद सरिता यह तुमने क्या किया मेरे विश्वास का गला घोंटा में उनमें से नहीं जो औरतों पर अत्याचार करते हैं में तुम्हें हमेशा हमेशा के लिए त्याग रहा हूं 

अविनाश सुनो में तुम्हें जनरल मैनेजर का पद देता हूं साथ ही बंगला करोड़ों कि कार देखो अविनाश यह सब हमारे तीनों के बीच रहेगा समझों सेठ लछ्मी चंद्र कि बात खत्म होने के पहले अविनाश ने जोर दार थप्पड़ जड़ दिया था निकल मेरे घर से और इस को भी लें जा जा कमीने तेरे जैसा नीच आदमी मैंने नहीं देखा तूने मेरा घर उजाड़ दिया है भगवान भी तुझे माफ नहीं करेगा ।

अविनाश का जीवन से मोहभंग हो गया था वह अक्सर इन्दौर कि सड़कों पर पागल जैसा दिखाई देता रहता है और सरिता से सेठ लछ्मी चंद्र हमेशा हमेशा के लिए संबंध खत्म कर लिए थे अब सरिता के पास पछताने के अलावा कुछ भी नहीं बचा था अवैध संबंध ने अच्छा खासा परिवार बिखेर दिया था 

कहानी कैसी लगी कमेंट करके बताइए 



 



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यूं  सेठ लछमी चंद को रूपयों पैसे कि कोई भी तंगी नहीं थी भगवान का दिया हुआ सब कुछ था दर्जनों  कारे  बंगले थे हजारों  करोड़ रुपए कि (रियल एस्टेट) कम्पनी के मालिक थे  अनेकों शहरों में व्यापार फैला था सेकंडों नोकर चाकर थे पावर इतना कि बढ़े बढ़े मंत्री चाय पीने को आते थे उच्च पदों पर बैठे सरकारी मुलाजिमों से अच्छा यराना था ऐक फ़ोन पर फाइलों में साइन करा लेने का अधिकार रखते थे वो बात अलग थी कि सेठ समय समय पर अपनी यारी नोटों के बंडल भेंट रूप में देकर निभाते रहते थे  खैर पैसे से कैसे पैसे बनाए जाते थे उन्हें हर गुर बखूबी आता था सेठ जी कि उम्र लगभग साठ साल के आसपास कनपटी पर सफेद बाल थुलथुल शरीर गोरे चिट्टे मध्यम कद चेहरे पर तेज पर शरीर में बहुत सारी बिमारियों ने बसेरा कर रखा था जैसे शुगर ब्लेड प्रेशर गैस आदि आदि फिर भी दिन भर भागदौड़ कर रात्रि  दो बजे तक हिसाब किताब में ऊलछे रहते थे यू तो एकाउंट को सम्हालने वाले सी ऐ भी थे पर उनके ही हिसाब किताब को चेक करते थे विश्वास अपने रोम पर भी नहीं था  अर्धांगिनी कभी कभी टोकती तब यू कहकर टरका देते कि बस अब आख़री साल ...

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