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कर्ज से मुक्ति

यूं  मुक्ति के अनेकों अर्थ है यानी मुक्त होने के जैसे कि कर्ज से मुक्ति,मन कि चिंता से मुक्ति, ,जीवन से मुक्ति इत्यादि पर ठाकुर साहब उस थकाऊ नौकरी से मुक्ति पाना चाहते थे जहां पर समय का कोई भी हिसाब किताब नहीं था , जहां का स्टाफ के कुछ सदस्यों को इंसान से कोई भी लेना देना नहीं था उसका कारण यह था कि बे कंपनी कि तरफ से पड़  लिखे इंजीनियर थे यानी किसी के पास सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा था या फिर डिग्री पर भले ही धरातल पर काम करने में बे सब जीरो थे पर कंपनी के अफसर उन्हें ही ज्यादा इज्जत देते थे  उन्हें ही ज्यादा पावर दिए गए थे जैसे कि सुपरवाइजर फोर मेन से ज्यादा से काम लेना मजदूरों को इंसान नहीं समझना , ठेकेदार से कमिशन लेंना आदि ठाकुर साहब कंट्रक्शन कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर थें उनका नाम नरेंद्र सिंह ठाकुर था बड़े ही सरल हृदय व दयालु थे साथ ही मेहनत कश कर्मठ, ईमानदार इसी के कारण वह मालिक लोगों के खासमखास थें उन्हें बहुत सारी जिम्मेदारी दी गई थी जैसे कि मटेरियल पर नजर रखना उसकी क्वालिटी चेक करना साइट कि अन्य व्यवस्थाएं फिर कंट्रक्शन के हर आइटम कि क्वालिटी कंट्रोल करना इत्याद...

पंचायत समाजिक कहानी


सुबह का समय था जाड़ों के दिन थे कोहरा छाया हुआ था वातावरण में शीतलहर चल रही थी जिससे हड्डियां पी कंपकंपा रहीं थीं ऐसे में अधिकांश लोग गांव में गाय भैंस कि सेबा कर दुध निकालकर भूसा खली डाल कर या तो विस्तर में रजाई में दुबके हुए थे या फिर अलाव जलाकर अपने शरीर को गर्म रख रहे थे कुछ लोग चाय के साथ गरमागरम मूंग दाल की चटपटे खा कर ठंडी का जश्न मना रहे थे कुल मिलाकर यह कोहरे के कुछ दिन किसानों को जी तोड़ मेहनत करने से छुटकारा दिला रहे थे गंगा राम बरामदे में अलाव जलाकर हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे सहसा उन्होंने बड़े बेटे घना राम को आवाज देकर कहा जरा मोबाइल फोन तो लाना देखो तो चेना राम कितना लापरवाह हो गया है एक हफ्ते से कोई खैर खबर ही नहीं दी अभी बच्चू कि ख़बर लेता हूं लगता है बच्चू को दिल्ली कि हवा लग गई है अभी सारे भुत उतार ता हूं गंगाराम ने मूंछों पर ताव देकर कहा था ।

चेनाराम छोटा बेटा था जो दिल्ली शहर में रहकर किसी कोचिंग संस्थान में पी एस सी , आई ए एस कि तैयारी कर रहा था पढ़ने लिखने में अव्वल था साथ ही देखने सुनने में भी सुंदर था दोहरे बदन का मालिक था बचपन से ही कसरत कर शरीर को मजबूत बना लिया था नागपंचमी पर्व पर गांव में कुस्ती का आयोजन होता था तब चेनाराम आस पास के गांव के पहलवानों को अखाड़ा में चारों खाने चित कर देता था उसकि जोड़ का पचासों गांव में कोई भी पहलवान नहीं था बेटे कि इस उपलब्धि पर गंगा राम का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता था वह दर्शक दीर्घा में बैठकर मूंछों पर ताव देकर जेब से हरे भरे नोटों कि गड्डी निकाल कर उस पर न्योछावर कर देता था हां भाई क्यों न हो जिसका ऐसा पहलवान सपूत होंगा व तो खुशी खुशी अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देगा इतना बड़ा पहलवान पिता के सामने भींगी बिल्ली वना रहता था पिता के सामने ऊंची आवाज ऊंची नज़र से कभी देखा भी नहीं था ।

गंगा राम ने हुक्का गुड़गुड़ा कर खो खो कर के घना राम से तु नम्बर डायल कर बच्चू के सभी एग्जाम पन्द्रह दिन पहले हों गये थें फिर न कोई खैर खबर न ही घर आया आने दो इस बार दो चार छड़ी न कमर पर दाग़ दी तब कहना गंगा राम के बड़े बेटे घना राम का व्याह हो गया था यहां तक कि दो बच्चों का पिता बन गया था परन्तु जरा सी चूक हुई तब उसका भी छड़ी से सत्कार होता था अभी भी दोनों बेटे उसकी नजर में बालक ही थें माता पिता कि नज़र में हमेशा बच्चे बालक ही रहते हैं बालापन कि सदारत नटखट पन रोना रूठना मचलना माता पिता को हमेशा याद रहता है इन्हीं यादों के सहारे वह अपने आप ही खुश होते रहते हैं यह कटु सत्य है ।

घनाराम ने नम्बर डायल किया था परन्तु वह बन्द आ रहा था दादा मोबाइल फोन बंद आ रहा है ।

कब से 

पिछले तीन दिनों से दादा में आप का दिल दुखाना नहीं चाहता था फिर डर भी लग रहा था दरअसल चेनाराम ने पड़ोस के गांव के चौधरी रामपाल कि बेटी से कानूनी प्रेम विवाह कर लिया ।

इतना सुनते ही गंगा राम के हाथ से हुक्का छूट गया था वह कुछ देर तक खामोश रहे थे शायद विचार मग्न हो गये थें आज उन्हें अपना जीवन नीरस दिखाई देने लगा था सारे जीवन मूंछों पर ताव देते रहे थे अब यह मूंछें समाज के सामने नीचे हो जाएंगी शाय़द उनके कठोर अनुशासन में कोई कमी रह गई होगी तभी तो बेटे ने यह कदम उठाया था कितने अरमानों को संजो कर रखा था कि चेनाराम जब अफसर बन जाएगा तब वह समाज में ही उसका व्याह धूमधाम से करेंगे बाराती लेकर जाएंगे विभिन्न प्रकार के बैंड बाजा होंगे और वह सभी रिश्तेदारों के बीच झूम झूमकर नाचेंगे परन्तु सब अरमान पर पानी फेर दिया फिर दूसरे पहलू पर विचार किया आज काल ज़माना बदल गया है बहुत सारे लड़के लड़कियां प्रेम विवाह कर रहे हैं एक हिसाब से सही भी है भाई एक दूसरे को जानने समझने पर ही तो सारे जीवन साध रहने का फैसला करते हैं कोई बात नहीं जो होंगा देखा जाएगा ज्यादा से ज्यादा समाज हुक्का पानी बंद कर देगा या फिर कोई जुर्माना ठोकेगा भगवान् कि कृपा से सब कुछ हैं सैकड़ों बीघा जमीन हैं पैसा है इज्जत रूतवा भी है  अगर शरीर के किसी अंग में फोड़ा हों जाता है तब उसे काटते नहीं उपचार करते हैं ।

  उन्हें आगे समाज के खाप पंचायत के कठोर फैसले का आगाह था जो सारे परिवार को आर्थिक सामाजिक मानसिक नुकसान पहुंचा सकता था घना राम से कहा था जरा बहू और अम्मा को भी बुला लें ।

सारे परिवार ने हर पहलू पर विचार किया था अंत में सभी ने एकजुट होकर चेनाराम का साथ देने का निश्चय किया था ।

गंगा राम का फोन बजने लगा था उस पार से चौधरी रामपाल सिंह बोल रहे थे धमकीं पर धमकी दें रहें थें कुछ देर तक तो गंगा राम उन्हें समझाने का प्रयास करते रहे थे जैसे कि भाई साहब दोनों ही बालिग थें साथ ही दिल्ली में कोचिंग कर रहे थे उनके बीच कब प्रेम हुआ कब विवाह कर लिया हम को नहीं पता था फिर आप अपने गिरेबान में झांकना जवान लड़की को दिल्ली में अकेला छोड़ दिया था भाई आपको तो अफसर ....अब देखिए तुम्हारी लड़की ही मेरे बेटे को भगा ले गयी मेरे बेटे का भविष्य सत्यानाश कर दिया अच्छा अच्छा उल्टा चोर कोतवाल को डांटे जाइए जो आपसे बने कर लेना अब आपकी बेटी मेरी बहू हैं कोई भी संसार कि ताकत मेरे बेटे बहू का कुछ नहीं बिगाड़ सकती अजी पंचायत कि क्या धमकीं देते हों हम सब निपट लेंगे समझें ।

चौधरी रामपाल ने समाज के दस गांवों के पंच इकट्ठे किए थे पंचों ने दोनों पक्षों कि दलीलें को सुना था फिर पंचों ने गंगा राम के परिवार को समाज से दस साल के लिए बहिष्कृत कर दिया था उसका हुक्का पानी बंद कर दिया था दस साल बाद पचास गांव के समाज के सभी परिवार के सदस्यों को धुआं बंद मतलब उस दिन किसी के घर में चूल्हा नहीं जलेगा सभी को भोज देना होगा अगर समाज में रहना हैं तब पचास लाख रुपए समाज कि कमेटी में जमा करने होंगे यह सब लिखा पढ़ी करके गंगा राम से पूछा गया था क्या आपको यह मंजूर है तब गंगा राम ने हाथ जोड़कर कहा मेरे बेटे ने मेरी नज़र में कोई अपराध नहीं किया था उसने प्रेम विवाह किया भाई वह बालिग था उसे अपना जीवन साथी चुनने का कानूनन अधिकार था जिसका उसने उपयोग किया फिर हम इक्कीसवीं सदी में चल रहे हैं इंसान मंगल ग्रह पर बस्ती बसाकर रहना चाहता है और हम सब अभी जाती पातीं में ही उलझे हुए हैं माना कि समाज में रहने के लिए हमारे पूर्वजों ने कड़े  नियम बनाए थे पर अब हमें उन नियमों में बदलाव करना होगा आप लोगों कि कृपा से में अभी पचास लाख रुपए कि जगह करोड़ रुपए दे सकता हूं पर नहीं दूंगा सुनते हैं पंचों के मुख से परमेश्वर बोलते हैं फिर भला परमेश्वर के आदेश को हम कैसे टाल सकते हैं उन्होंने दस्खत कर दिए थे अब सारा परिवार गांव समाज से कट गया था उन्हें हीन दृष्टि से देखा जा रहा था ।

लगभग एक साल बाद चेनाराम अपनी दुल्हन के साथ आया था दुल्हन भारतीय परिधान में बहुत सुंदर दिख रही थी बेटा बहू कि आरती उतारी जा रहीं थीं अम्मा बढ़ी  बहु के साथ मंगल गीत गा रही थी सारे परिवार में उत्सव जैसा माहोल था अब चेनाराम कि  देह पर आई पी एस अधिकारी कि पुलिस कि वर्दी थी उसे खुद का जिला मिल गया था  वह जिला का पुलिस कप्तान था  घर आते ही यह खबर समाज व आसपास के गांवों में पहुंची थी उसके घर पर भीड़ जमा हो गई थी उसी भीड़ में चोधरी रामपाल सिंह भी मौजूद थे वह बेटी दामाद को देखकर गदगद थें फूले नहीं समा रहे थे उन्होंने हाथ जोड़कर गंगा राम जी से कहा था पिछली गलती के लिए माफ़ी मांग रहा हूं समाज के डर दबाव से खाप पंचायत बुलाई थी अब हम रिश्ते दार है तब गंगा राम ने हंसते हुए कहा था समधी जी मुझे बेटे पर भरोसा था मुझे पता था कि यह मेरी मूंछ नहीं झुकने देगा  पंच परमेश्वर भी थे जो मिठाई फल बढ़े सोक से खा रहे थे आज उन्होंने खुद का फैसला पलट दिया था क्योंकि लड़की से प्रेम विवाह करने वाला पावर में अब उसकी सभी गलती अच्छाई में बदल गई थी एक बार गंगा राम जी फिर से पंचों को देखकर मूंछ पर ताव दे रहे थे ।

समाप्त 

यह कहानी आप को कैसी लगी कमेंट कर बताइएगा आपका दोस्त काका 

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