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संदेश देते स्वप्न लेख ‌

कहते हैं कि रात्रि के अंतिम पहर में देखे गए स्वप्न कुछ संकेत देकर जातें हैं जिन्हें समझना आसान नहीं है जिन्होंने समझा उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज कर लिया कहीं पढ़ा था कि सिलाई मशीन बनाने वाले सज्जन ने सारा ढांचा तैयार कर लिया था सभी कलपुर्जे जोड़ दिए थे परन्तु वह धागा कि सुई कहा लगाएं समझ में नहीं आ रहा था दिमाग पर बहुत जोर डाला अनेकों बार कल पुर्जे को चैक किया ढांचा में भी फेरबदल किया परंतु सुई कहां फिट करें समझ से परे था ।
हर प्रकार से हतोत्साहित होकर वह अवसाद ग्रस्त हो गये थें स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ गया था कारण जो कि वर्षों कि मेहनत पर पानी फिर गया था ऐसे ही अवसाद ग्रस्त अवस्था में स्वप्न में कोई उनके सीने पर सुईयां चुभा रहा था वह दर्द से छटपटाने लगे थें उसी छटपटाने से उनकी नींद खुल गई थी आंख मलते ही याद आया था कि वह तो एक स्वप्न था सहसा उन्हें लगा कि सीने पर सुइयां चुभोना कुछ संकेत दे रहा है सिलाई मशीन के लिए कुछ कह रहा है फिर क्या था उन्होंने स्वप्न के संकेत को समझकर ढांचे में सुधार कर सुइ फिट कर संसार के सामने सिलाई मशीन का अविष्कार कर अपना हमेशा हमेशा के लिए इतिहास में नाम दर्ज कर लिया ।
ऐसे बहुत सारे उदाहरण है संसार के अनेकों धर्म के गृंथ में बहुत सारे उदाहरण है जिनके नींद के स्वप्न सच साबित हुए ।
में कुछ दिनों से जब भी निंद के आगोश में समा जाता तब लगातार कोइ नदी या फिर झील या फिर तालाब, सागर,के तट के नजदीक अपने आप को खड़ा हुआ देखता किसी नदी कि अथाह जलराशि में तेरता रहता वहते पानी के आवेग को काटकर दूसरे किनारे पर जाने के लिए हाथ पैर चलाता कभी कभी तेज बहाव में बह जाता फिर कोई तिनका या फिर चट्टान को पकड़ कर प्राण बचाने के लिए संघर्षरत रहता डर कर नींद से बाहर निकल जाता कुलमिलाकर मझधार में ही लटका रहता अब हम इस स्वप्न का क्या अर्थ निकालें क्या यह हमें यह संदेश देता है कि जीवन जीना आसान नहीं है यहां पर पग पग पर संघर्ष करना पड़ेगा अनेकों बार तुम विफलताओं से टूट कर बिखर जाओगे इन विफलताओं से तुम्हें अपना जीवन निर्थक लगने लगा था परन्तु यह जीवन निर्थक नहीं है यहां पर संघर्ष करना पड़ेगा फिर देखना संघर्ष का परिणाम जीवन जीने कि दशा दिशा ही बदल देगा ।
पिछली रात्रि के अंतिम पहर में नींद के आगोश में समाया हुआ था मुंह से खर्राटे निकल रहें थें दुनिया जहान से दूर शरीर आराम कर रहा था तभी कुछ इंद्रियां देह से निकल कर गहरी झील जिसका आकार बहुत बड़ा था दूर दूर तक जल ही जल दिखाई दे रहा था जिसके तटबंध बहुत मजबूत थें जिसकि लहरें तटबंध से बाहर जाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही थी किन्तु वह सफल नहीं हो पा रही थी में कुछ देर तक वह दृश्य देखता रहा था सहसा मन में ख्याल आया कि निर्मल जल अथाह जलराशि में तैरना चाहिए फिर क्या में झील में कूद पड़ा था झील के दूसरे किनारे पर जाना चाहता था बीच मझधार में पहुंचा ही था तभी ख्याल आया कि मगरमच्छ न हो ख्याल आते ही हाथ पैर कुछ छड़ों के लिए शिथिल  हो गए थे पानी कि अथाह जलराशि में समाधी लेने वाला ही था तभी प्राण बचाने के लिए शिथिल हुए हाथों को दिमाग ने कमान दी थी आंखों को दूसरा किनारा दिखाया था जो कि पास ही नजर आ रहा था परिणामस्वरूप में दूसरे किनारे पहुंच गया था कुछ देर विश्राम कर मगरमच्छों के मुंह का निवाला न बना था भगवान को धन्यवाद दे रहा था तभी नजदीक के गांव से कुछ बच्चे झील में कूद कर तेर रहें थें कुछ तो ऐक दूसरे से कोन जल्दी दूसरे किनारे जाएगा शर्त लगा रहे थे और मैं अंदर ही अंदर डर रहा था कि कहीं यह सब बच्चे मगरमच्छ का निवाला नहीं बन जाए मैंने पूछा कि तुम सबको मगरमच्छ का डर नहीं लगता तब सब खिलखिला कर हंसने लगे थें ऐक ने कहा कि मगरमच्छ तों इस झील में कभी नहीं थें यह आपको पता नहीं ।
में समझ गया कि हमारा मन ही हमें डराता है हमारा मन ही हमें  पार करता है शायद स्वप्न यहीं संदेश दे रहा था कि कभी भी जीवन में निराश नहीं होना चाहिए कभी भी मन के मगरमच्छ से घबराकर मैदान नहीं छोड़ना चाहिए ।


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