Skip to main content

Posts

Showing posts with the label दूल्हा

कागजी पहलवान

सांध्य का समय था पंछी टोलियां बनाकर आपस में बात चीत करते हुए पंख फड़फड़ाते हुए अपने अपने घोंसले कि और जा रहें थें दूर कहीं पहाड़ पर सूर्य देव कि आखरी किरण अपनी आभा बिखेर रही थी ऐसे ही समय में कागजी पहलवान अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से गांव आ रहा था चूंकि उन दिनों गांव के लिए पक्की सड़क नहीं थी सकरी सी गली थी उसी गली से गांव के जानवर जैसे कि गाय भैंस बकरी बैलगाड़ी ट्रेक्टर के लिए यहीं गली ही थी तभी तो कागजी पहलवान को संध्या समय कि ऐसी बेला में बुलेट चलाने में परेशानी आ रही थी वह कभी जोर जोर होरन बजाता तब कभी बुलेट ऐक और करके खड़ा हो जाता तभी ऐक चरवाहे ने कहा लगता है कि पहलवान कोई मेहमान आए है  हां हां भाई ससुराल से आए है पहलवान ने मूछ पर ताव देकर जबाब दिया था दरअसल बुलेट मोटरसाइकिल के पीछे कि सीट पर सुन्दर सजीला नौजवान बैठा था । हां हां भैया भौजी के तब तो भाई होंगे ही ही ही कर के हंसने लगा था  खैर कागजी पहलवान जैसे तैसे गांव के नजदीक पहुंच कर शराब कि दुकान पर रूक गया था बुलेट मोटरसाइकिल को खड़ा कर वह काउंटर पर पहुंच गया था  कहां से आना हो रहा है पहलवान सेल्समैन ने पूछा था  रेलवे स्टेशन से  ल

तमाचा समाजिक लघुकथा

मिसेज शालीन मिस्टर अभिषेक के छोटे बेटे का व्याह हों गया था दंपति शहर के जाने माने पैसे वाले लोगों में गिने जाते थे अपने धन दौलत का दिखावा करने के लिए उन्होंने  तीन दिन बाद सामूहिक भोज का आयोजन रखा था इसके लिए  बढ़ा गार्डन किराए से लिया गया था गार्डन को भी दुल्हन जैसा सजाया गया था खूबसूरत रंगभरी लाइटें आसमान के तारों जैसी झिलमिला रही थी एक और विशाल स्टेज तैयार किया गया था सिंहासन पर दूल्हा दुल्हन बैठे हुए थे लोग रिश्तेदार आ आ कर आर्शीवाद गिफ्ट दें रहें सभी को कवरेज करने के लिए ड्रोन कैमरा हर एंगल से फोटो विडियो बना रहा था मेन गेट पर शहनाई वादन हो रहा था दूसरी ओर डीजे पर फिल्मी गाना लो में चली अपने देवर कि बरात लेकर में चलीं उस धुन पर बढ़ी बहू दुल्हे को स्टेज से नीचे लाकर डांस कर रही थी दर्शक मोबाइल फोन से विडीयो बना रहे हैं मेहमान तारीफों के पुल बांधे जा रहे थे बाहर सिक्योरिटी गार्ड बिसल बजाकर गाडियां पार्क करा रहे थें । चूंकि बफर सिस्टम चल रहा था मेहमान हाथ में कटोरी प्लेट लै लें कर मनपसंद पकवान परोश परोश कर खा रहे थे कुछ मिठाइयां कि तारीफ़ कर रहे थे तब वहीं कुछ लोग आलोचना कुछ लोग खामो