यूं मुक्ति के अनेकों अर्थ है यानी मुक्त होने के जैसे कि कर्ज से मुक्ति,मन कि चिंता से मुक्ति, ,जीवन से मुक्ति इत्यादि पर ठाकुर साहब उस थकाऊ नौकरी से मुक्ति पाना चाहते थे जहां पर समय का कोई भी हिसाब किताब नहीं था , जहां का स्टाफ के कुछ सदस्यों को इंसान से कोई भी लेना देना नहीं था उसका कारण यह था कि बे कंपनी कि तरफ से पड़ लिखे इंजीनियर थे यानी किसी के पास सिविल इंजीनियर का डिप्लोमा था या फिर डिग्री पर भले ही धरातल पर काम करने में बे सब जीरो थे पर कंपनी के अफसर उन्हें ही ज्यादा इज्जत देते थे उन्हें ही ज्यादा पावर दिए गए थे जैसे कि सुपरवाइजर फोर मेन से ज्यादा से काम लेना मजदूरों को इंसान नहीं समझना , ठेकेदार से कमिशन लेंना आदि ठाकुर साहब कंट्रक्शन कंपनी में सीनियर सुपरवाइजर थें उनका नाम नरेंद्र सिंह ठाकुर था बड़े ही सरल हृदय व दयालु थे साथ ही मेहनत कश कर्मठ, ईमानदार इसी के कारण वह मालिक लोगों के खासमखास थें उन्हें बहुत सारी जिम्मेदारी दी गई थी जैसे कि मटेरियल पर नजर रखना उसकी क्वालिटी चेक करना साइट कि अन्य व्यवस्थाएं फिर कंट्रक्शन के हर आइटम कि क्वालिटी कंट्रोल करना इत्याद...
अंधेरी भादों मास कि ट्रेन घुप्प अंधेरे को चीरती हुई आगे बढ़ रही थी कभी कभी तेज बिजली चमकने से खिड़की से रोशनी अंदर पहुंच रही थी बाहर तेज वारिस हो रही थी ऐसे ही मौसम में में अहमदाबाद से इंदौर आ रहा था मेरी बर्थ नीचे थी सोचा कि सोने से पहले कुछ पेट पूजा कर लूं क्यों कि सुगर वाले मरीज को भूख ज्यादा ही लगती है इसलिए मैंने रेलवे स्टेशन से ही फल नमकीन बिस्कुट पहले ही खरीद कर रख लिए थे चूंकि मेरी बर्थ नीचे थी सामने वाली बर्थ पर एक नौजवान आदमी उदास बैठा हुआ था चेहरे मोहरे से वह बहुत ही सभ्य अच्छे खानदान का लग रहा था मैंने उसके उपर एक सरसरी नजर डाली थी उसका चेहरा भले ही मुरझाए हुए था पर चेहरे पर मासूमियत भरी हुई थी किसी छोटे बच्चे कि तरह फिर मैंने उस कि कद काठी के मुआवना किया था भरी हुई देह थी बाहें कसी हुई थी सीना चौड़ा था चेहरा भी खूबसूरत था चेहरे पर काली स्याही मूंछें उसके व्यक्तित्व पर चार चांद लगा रहीं थीं कुल मिलाकर कर उसका व्यक्तित्व मर्दानगी से भरा हुआ था वह मोबाइल पर कुछ पड़ रहा था मुझसे रहा नहीं गया था मैंने उसे टोक कर कहा था भाई कहां जाना है । जी इन्दौर उसने जवाब दिय...