कहते हैं कि मौन में बहुत शक्ति है मौन साधना से बड़ी कोई भी साधना कभी भी अकेले नहीं होती है आप अपने देखने के टैग से जान लें कि हमारे अंदर की भीड़ में हम अपने अंदर हंकारते हैं। क्या कभी आपने अकेले में अपनी आत्मा से एकांत में भाग लिया है शायद आज हमारे पास समय ही नहीं है क्योंकि यह सोशल मीडिया का जमाना है क्योंकि यह विज्ञान की मशीन का जमाना है क्योंकि मनुष्य बटन एक पर सब कुछ बताता है और यहां तक जाता है कि हमारे शरीर में कौन सी कमी है हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारे शरीर को किसी भी तरह से कुछ तैयार करना चाहिए हमें फिर से बताएं कि हम क्यों हैं कि आप अपने साथ एक साथ रहें। है. कभी-कभी हम आपको अलग-अलग दिखाते हैं क्योंकि आधुनिक युग में परिवार का एक दूसरे के लिए प्रेम मंदिर न तो बचा है और न ही खाली हो रहा है। शांति समाप्त हो गई है और हमराद्रा में ग्राहक अपना सब कुछ खो देते हैं ठीक है अब सवाल है कि हमें मौन साधना क्यों करनी चाहिए। कहते हैं कि मन के हारे-हारे है मन के जीते हुए मन क्या करता है, यह बहुत ही सूक्ष्म प्रश्न है, बड़े-बड़े साधक, संतों के पास, संतोष के पास, उत्तर नहीं, यह बोध...
सुना है कि नर्क भी होता है । जहां आत्मा को कष्ट भोगना पड़ता है। सारे जीवन का लेखा-जोखा देवदूत आत्मा के सामने रखते हैं फिर न्यायालय जहां उनके भी न्यायमूर्ति न्याय के लिए आत्मा से सवाल जवाब करते हैं । चूंकि सुना है कि वहां पर काले कोट का वकील नहीं होता जो वहस कर , दंड से मुक्त करा दें या फिर किसी न्यायालय के न्यायाधीश को कुछ रकम या धन क्लर्क के माध्यम से पहुंचा दें ? चूंकि यह व्यवस्था वहां नहीं है । इसलिए आत्मा को ही परमात्मा से सवाल जवाब करने पड़ते हैं । जैसे कि सारे जीवन क्या किया मानव मूल्य का कितना पालन किया ? माता पिता, बुजुर्ग,कि सेवा कि या नही ? परिवार के प्रति वफादार रहें कि नहीं । तुम पति-पत्नी बन गये थे समाज ने तुम्हरा व्याह कराया था फिर क्यों संभोग सुख के लिए पर पुरुष पर नारी का उपयोग किया ! जल का कैसा उपयोग किया जमीं के लिए कितना छूठ बोला वनस्पतियों की इज्जत कि उन्हें पानी दिया कि नही ? खुद के सुख के लिए या व्यापार के लिए कितने पेड़ पोंधे क...