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"काल गर्ल "बेव सीरीज स्टोरी भाग -3

 पिछले भाग से आगे....  पिछले भाग से आगे .... करूणा अभिजात्य वर्ग के अय्याश पुरुषो में जल्दी ही लोकप्रिय हो गयी थी उसकि अदाएं पर कुछ तो अपना सर्वस्व न्योछावर करने को भी राजी थें कुछ तो उससे विवाह करना चाहते थे कुछ के लिए तो वह केवल भोग कि वस्तु ही थी कूछ के खेलने वाली मोम क गुड़िया कुछ के लिए रिमोट कंट्रोल से चलने वाली गुड़िया जो कि हस्ते हुए मुस्कुराते हुए अपने मालिक का मनोरंजन करते कुछ के लिए तो वह रूप यौवन के अथाह सागर कि मल्लिका थी खैर मिस्टर नागपाल ने उसका अपने व्यापार के विस्तार हेतु उपयोग किया था वर्षों से अटकी फाएले जो अधिकारियों कि टेबल पर पड़ी हुई धूल कि परत में दबी हुई थी वह साफ होकर अलमारी में पहुंच गई थी सालों से अटके प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य शुरू हो गया था इतना सब होने के बाद भी करूणा के हाथ में कुछ नहीं था मतलब कोई भी धन संचय नहीं था उल्टा वह शराब सिगरेट कि आदी हो गयी थी नशा उतरने के बाद वह गम्भीरता से इस दल दल से निकलने का विचार करतीं थीं परन्तु उसे दूर दूर तक दल दल से बाहर निकालने का मसीहा नज़र नहीं आता था एक दिन ऐसे ही विचार मग्न थी तभी नागपाल का फोन आया था उसने कह

"कार्ल गर्ल " वेब सीरीज भाग२ करूणा कि व्यथा कथा

पहले भाग से आगे.....… हां यकिन नहीं आपने ऐसा क्यों किया मेरे राजकुमार देखो तो अब तुम्हारी रानी जीवन के समर के मैदान में अकेली लड रही  है दूर दूर तक कोई सहारा नहीं मुझे भी साथ ले चलते फिर कुछ छड़ों बाद तुम्हें पता है मेरे राजकुमार जिस देह कि खूबसूरती का आप तारीफें के पुल बांधते थे जिस देह के अंगों पर अपने प्यार कि मुहर लगा कर कहते थें देख करूणा कभी भी किसी अन्य  पुरुष से तूने बातचीत कि या फिर मेरी संपत्ति को किसी ने छेड़छाड़ कि मुझे भनक भी लगीं तब में उसी समय अपने प्राण त्याग दुंगा मेरे राजकुमार आज तुम्हारी रानी किसी पुरुष कि रखैल है  फिर वह मेरी देह के साथ कैसा व्यवहार करता है कहने में संकोच होता है कहते हैं कि मरने के बाद भी कुछ महीने या दिन आत्मा अपने सगे संबंधियों या फिर अपने प्रिय के आसपास भटकती रहती हैं तब आप तों उस सेठ का मेरे साथ विस्तर पर देखते होंगे ।  भावविभोर होकर वह रोने लगी थी सामने अथाह सागर उसके आंसुओं कि अविरल धारा को देखकर दुखी मन से अपने तट बंध से बाहर निकलने कि कोशिश कर रहा था मानो वह कह रहा था कि देख बेटी यह मानव समाज तेरे लिए नहीं यह समाज अब अपने आप को भूल गया बेटी

काल गर्ल वेब सीरीज भाग 1 व्यथा कथा

 पिछले भाग से आगे.... भादों महीने में यूं तो घनघोर बारिश होना आम बात है परन्तु पिछले तीन दिनों से ज्यादा ही तेज़ गरज चमक से मेघ धरती पर मोटी मोटी बूंदें बिखेर रहे थे ऐसी घनघोर बारिश में मुम्बई का आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था नौकरी पेशा लोग दफ्तर आने जाने के लिए परेशानी का सामना कर रहे थे वहीं जिला प्रशासन ने स्कूल कालेज की छुट्टी कर दी थी कारण शहर कि अधिकांश सड़कें पर पानी लबालब भरी हुयी थी कुछ सड़कें पर पानी का बहाव बहुत ही तेज था मतलब उस बहाव में मोटरसाइकिल कारें भी वह गयी थी हालांकि नागरिकों के सहयोग से कोई जनहानि नहीं हुई थी खैर बरसात के मौसम में निचली बस्तियों में यह सब तों आम बात है ऐसे ही मौसम में हिचकोले खाती हुई पानी को चीरती हुई मर्सिडीज कार एक छोटे से खूबसूरत बंगला के पोर्च में खड़ी हो गई थी बंगला के आस पास पचास एकड़ खाली जमीन थी कुछ जगह रोड कंस्ट्रक्शन कम्पाउन्ड वाल  रो हाउस का काम चालू था कालोनी डबलप हों रहीं थीं कार के अंदर बैठे आंगतुक ने  झटके से कार का दरवाजा खोला था वाहर निकलने वाला शख्स लम्बा मजबूत देह का मालिक था साठ साल कि उम्र होने के बाद भी नवयुवक जैसा चुस्त दु