Skip to main content

"सबला"कविता.

 में ऐक आधुनिक युग कि नारी हूं

में अबला नहीं सबला कहलाती हूं 

मे उड़ाती हूं फाइटर प्लेन और चलातीं हूं 

पानी के जहाज !

ट्रेनिंग लेकर थामती हूं हाथों में हथियार 

करतीं हूं देश कि सीमाओं पर 

दुश्मन का  संहार 

रखतीं हूं मां भारती कि लाज

क्यों कि मैं ऐक नारी हूं ।

सदियों पहले जन्म लेकर 

कहलाती थी अभिशाप 

मां को मिलते थे ताने और उलहाने 

फल स्वरूप मिलता था तिरस्कार !

फिर भी मे मां कि रहतीं थीं लाडली

पिता कि कहलाती थी लछमी

त्योंहार पर पूजकर पांव 

खिलाते था अच्छे अच्छे व्यंजन 

यहीं तो दोहरा मापदंड का

 समाज 

क्यों कि मैं ऐक नारी हूं ।

स्कूल जाना  था मुश्किल काम 

पढ़ कर क्या करोगी करना 


 पड़ेगा



रोटी  चूल्हा जलाना सीखो रोटी बनाना सीखों 

यही आएगा जीवन में काम 

क्यों कि मैं ऐक नारी हूं।

नाबालिग में रचते थे अधेड़ से शादी 

जो रोज करता था मनमानी फिर बालात्कार 

कहीं चढ़ती थी दहेज़ कि वली 

कहीं बेच देते थे मां बाप 

किसी  रहीश को कुछ रूपए में हजार 

फिर वह नोंचता रहता था देह 

 हजारों हजार बार !

आत्म सम्मान का नहीं मिलता था भाव 

कोख में बच्चा ठहरता था 

करा देते थे आपरेशन क्यों कि मैं 

ऐक देह थी विस्तर कि शोभा थी 

कयो कि में ऐक नारी थी ।

समय बदला  समाज वहीं था विचार बदलें 

बदल गया है युग 

आज है आधुनिक युग 

न मै बोझ हूं न 

ही अभिषप्त हूं 

मे हू मां बाप कि लाडली 

पति कि दुलारी 

सास ससुर जी को प्यारी

परिवार के सदस्य देते हैं इज्जत 

क्यों कि में एक नारी हूं 

पति कि दुलारी हूं !

देश कि बेटी हूं

क्यों कि मैं राष्ट्र के प्रति 

जाती हूं सेना मे 

देती हूं प्राणों कि आहुति 

बैठती हू मंत्री बनकर 

विदेश  सचिव 

चुटकियों में सुलझाइए  मसले

भले ही देश के आंतरिक मामले हो

या विदेश कि खाद्य सुरक्षा 

या महामारी हो क्यों कि

में एक नारी हूं


जिससे होता है मानव का भला 

नही होता कहीं भी बुरा 

में मां भारती कि खुबसूरत परी हू 

क्यों कि मैं ऐक नारी हूं ।।





Comments

Popular posts from this blog

दो गज कि दूरी

यूं  सेठ लछमी चंद को रूपयों पैसे कि कोई भी तंगी नहीं थी भगवान का दिया हुआ सब कुछ था दर्जनों  कारे  बंगले थे हजारों  करोड़ रुपए कि (रियल एस्टेट) कम्पनी के मालिक थे  अनेकों शहरों में व्यापार फैला था सेकंडों नोकर चाकर थे पावर इतना कि बढ़े बढ़े मंत्री चाय पीने को आते थे उच्च पदों पर बैठे सरकारी मुलाजिमों से अच्छा यराना था ऐक फ़ोन पर फाइलों में साइन करा लेने का अधिकार रखते थे वो बात अलग थी कि सेठ समय समय पर अपनी यारी नोटों के बंडल भेंट रूप में देकर निभाते रहते थे  खैर पैसे से कैसे पैसे बनाए जाते थे उन्हें हर गुर बखूबी आता था सेठ जी कि उम्र लगभग साठ साल के आसपास कनपटी पर सफेद बाल थुलथुल शरीर गोरे चिट्टे मध्यम कद चेहरे पर तेज पर शरीर में बहुत सारी बिमारियों ने बसेरा कर रखा था जैसे शुगर ब्लेड प्रेशर गैस आदि आदि फिर भी दिन भर भागदौड़ कर रात्रि  दो बजे तक हिसाब किताब में ऊलछे रहते थे यू तो एकाउंट को सम्हालने वाले सी ऐ भी थे पर उनके ही हिसाब किताब को चेक करते थे विश्वास अपने रोम पर भी नहीं था  अर्धांगिनी कभी कभी टोकती तब यू कहकर टरका देते कि बस अब आख़री साल ...

पति-पत्नी और वो किस्सा

             ऐक था राजा उसका ऐक राजकुमार था राज्य में सब कूशल मंगल था ऐक दिन राजा राजकुमार को राज सौंप कर तीर्थ यात्रा को निकल गया राजा के जाने के बाद राजकुमार अपनी सूझबूझ से राज्य चलाने लगा था चारो ओर शांति समृद्धि कायम हो रही थी जो कुछ चाटूकारों को अच्छी नही लगती थी  ऐक दिन ऐक गरीब ब्राह्मण राज दरबार में आया था उसे अपनी पुत्री का विवाह करना जा चूकि गरीब होने के कारण धन नहीं था पत्नी के बार बार कहने पर वह आया था पर ब्राह्मण सिद्धांत का पक्का था बिना कुछ दिए हुए भिक्षा भी नहीं लेता था खैर राज दरबार में ऊसका यथोचित सत्कार किया गया था राजकुमार ने आने का कारण पूछा तब ब्राह्मण ने कहा हे राजन मुझे अपनी कन्या का विवाह करना है मेरे पास धन की कमी है अतः मुझे आपसे आर्थिक मदद चाहिए तब राजकुमार ने कहा हे ब्राह्मण आपके लिए रात को खोल देता हूं आपको जितना भी लगे आप ले जा सकते हैं तब ब्राह्मण बोला नहीं नहीं राजन मैं फ्री में किसी से दान भी नहीं लेता मैं आपको एक कागज दे रहा हूं वक्त आने पर इसे पढ़िए गा बहुत काम आएगा खैर ब्राह्मण कागज दे कर धन लेकर अपने घर रवाना ह...

काल गर्ल बैब स्टोरी भाग 07

 उसने चाय बना दी थी दोनों ही नीचे चटाई पर बैठकर चाय कि चुस्कियों लें रहें थें व एक दूसरे को निहार रहे थे कुछ देर बाद विनय कुमार ने कहा था कि आप बुरा नहीं माने तब में आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि मेरी पेंटिंग जो आप देख रहीं हैं वह अधूरी है मैं उस पेंटिंग को आपके सहयोग से ही पूरा कर पाऊंगा जैसे कि गुलाबी शुष्क अधर , उन्नत वक्ष,पतली कमर,कमर वह फिर कुछ देर के लिए नग्न हो सकती है मेरा मतलब.... करूणा यूं तो सैकड़ों बार अलग अलग पूरूसो के साथ नग्न हो चुकी थी लेकिन उसे न जाने क्यों आज शर्म आ रही थी करूणा ने सालीनता से जी नहीं  विनय कुमार को शायद जी नहीं जबाब कि उम्मीद नहीं थी उसका चेहरा उदास हो गया था कुछ सोचने लगा था तभी करूणा ने कहा था कि आज नहीं फिर कभी अच्छा आज आप मेरे साथ मेरे फ्लेट पर चलेंगे सहसा ऊसे याद आया था कि आज तो उसकी होटल ब्लू रोज में फुल नाइट कि बुकिंग फुल सर्विस के साथ थी पैसा भी लाखों मिल रहा था उसने मोबाइल निकाल कर संबोधित पुरूष को तीन दिन बाद मिलने का यू कहकर कि वह महीने से हैं जैसा आप चाहते हैं बैसी सर्विस नहीं दे पाऊंगी इसलिए तीन दिन बाद व्हाट्सएप पर मैसेज भेज दिय...