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दादी कि सूझबूझ

 

  1. भोर का समय था दूर कहीं मंदिर कि घंटि के साथ शंख कि आवाज आ रही थी उसके कुछ ही देर बाद कहीं दूर मुर्गा बाग लगा रहा था जिसकि आवाज रेल गाडी निकलने कि छप छप अवाज से दब रही थी शायद कोई मालगाड़ी निकली थी ऐसे ही समय में सुरभि पति कि छाती पर सिर रखकर नींद के आगोश मै खोई हुई थी पति कि सासो लेने से उसका सिर भी छाती के साथ उपर नीचे हो रहा था फिर भी वह निश्चित होकर सो रही थी चूंकि सुरभि पुलिस अधिकारी थी डयूटी से देर रात वापिस घर आई थी तभी तो घोड़े बेचकर पति के आगोश के सहारे घोड़े बेचकर सो रही थी तभी मोबाइल फोन कि घंटि बज उठी थी पति ने सिरहाने के पास छोटी सी टेविल थी जिस पर मोबाइल रखा हुआ था हालाकि सुरभि ने पति को निर्देश दे कर रखा था कि संगे संबंधियों का कभी भी ऐसे समय में फोन आऐ तब रिसीव कर लीजिये वरना नही पति ने आंख मिचमिचाते हुऐ नम्बर नाम देखा था फिर हैलो हैलो कह कर जी कहिए सुरभि अभी नींद में हैं ओह हां हां जी मे उसे अभी नहीं कहूंगा हा ठीक हैं आने वाला कॉल सुरभि कि मां का था चूंकि सुरभि कि दादी जिंदगी कि सफल पारी खेलकर अंतिम सफर पर हमेशा हमेशा आसमान में तारो के पास चली गई थी या फिर आत्मा का परमात्मा से मिलन हो गया था पक्का तो पता नहीं कारण इस विषय पर विज्ञान भि फैल हैं ।

सुबह जब सुरभि जागी थी तभी पति बेड टी लेकर मुसकुराते हुए पंलग के पास खडे थे सुरभि कि जैसी आदत थी उसने भी मोबाइल उठाने के लिए हाथ बढाया था किंतु मोबाइल नहीं था तभी तो उसने प़शन कि नजर से पति कि और देखा था तब पति ने अच्छा हा मैंने मोबाईल चार्ज पर लगा दिया है और हां आप फटाफट तैयार हो जाइए हम लोग कही घूमने चलते है और हां मैंने पुलिस कप्तान साहब से बात कर ली हैं हा भाई  आपके ऐस पी साहेब उन्होने आपको छुट्टी दे दी है हा भाई  क्यो न में भी तो आपका जीवन साथी जो कलेक्टर के पद पर जिले में आसीन हैं दर असल दोनों ही बडे अफसर थे ।

ऐक घंटे बाद सरकारी गाड़ी इनोवा मे दंपति सवार हो कर सफर को निकल गये थे डाईवर के बगल में गनमैन मुस्तैदी से बैठा हुआ था कार चिकनी सडक पर बल खाती नागिन जैसी भाग रही थी भीड भाड व टोल टैक्स को देखकर डाईवर हूटर बजाकर सभी को चेतावनी दे रहा था जैसे की हूटर का मतलब यह कोई आम आदमी कि कार नही यह तो खुद जिला कि सरकार कि कार हैं इस कार के अंदर बैठा हुआ सख्त जिसके विवेक से जिला चलता हैं जिसके आदेश से विकास कार्य होते है जिसके आदेश से गरीबों का भला होता है और जो उनकी पत्नी है वह भी शहर कि अतिरिक्त पुलिस अधिकारी हैं मतलब ऐस पी ।

सुरभि आने वाले फोन को रिसीव कर अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दे रहीं थी उनसे फोन के आने वाले नम्बर पर नजर डाली थी भोर के समय मां के काल पर नजर पड़ी थी तभी तो उसने पतिदेव कि तरफ देखकर मोबाइल कि सक़ीन को दिखाया था देखकर पति ने दादी चली गई कहा था यह सुनकर सुरभि ने सिसकते हुए आपने मुझे ......

अपने आप को सम्भालो तुम्हारे अलावा हमारे डाईवर, गन मैन को भी मालूम है की दादी चल वसी और हम लखनऊ जा रहै है सुरभि के मनमस्तिष्क में किसी चल चित्र जैसे बीते चित्र आ जा रहे थे उसे याद आया था जब वह आठ साल कि थी तब रिशते का मामा घर आकर उसे गोद में बैठाकर वाह वाह मेरी बेटी बढी हो रही बाह बाह उसके गाल तानकर चुंबन लेने लगता था ऐक दिन दादी ने उसकि हरकतों को देख लिया था तब उसे वे इज्जत होकर घर से बाहर कर दिया था और जब वह वारह साल में थी बचपन से किशोर अवस्था में प़वेश कर रही थी देह में बहुत सारे परिवर्तन हो रहे थे उन परिवर्तन पर पड़ोस के चाचाजी कि गिद्ध जैसी नजर थी वह कभी भी मौका देखकर देह के अंगों को टटोल कर हाथ साफ करने लगते थे ऐक दिन दादी जी ने उनकि नियत को ताड लिया था हमेशा हमेशा के लिये खबरदार कर दिया था ।

जब वह सोलह साल मे थी देह के सभी अंग परिपक्व हो गये थे वह रजोगुण से भी हो गयी थी ऐसे में उसके मन में खासकर लढको के पति रुझान हो रहा था या फिर किसी अंकलजी शायद सोलह साल कि वारी उम्र कि दैह कुछ अलग आंनद लेना चाहती थी में ऐक दिन पड़ोस के लडके के साथ उसके घर पहुंच गयी थी चूकि उसके माता पिता वाहर थे ऐसे में हम दोनों ने इस अवसर  का फायदा उठाने का पहले से ही प्लान किया था में जैसी ही उसके घर पहुंची थी तभी दादी ने डोरबेल बजाकर मुझे आवाज़ दी थी फिर घर आकर बडे ही प्यार से समझाया था बेटी मे जानती हू यह उम़ ही ऐसी ही है बहकना लाजिमी है होता है सभी गलतियां करते हैं पर बेटा अभी तुझे पढाई कर अपना भविष्य बनाना हे ऐसे में बेटा तुझे शरीर कि ईच्छा के साथ भावना पर भी नियंत्रण करना होगा बेटी तुम्हे बहकाने वाले बहुत मिलेंगे किंतु वहकना कभी भी नही में तेरे पिता से कहकर तेरी शादी अभी कहीं भी करा दूंगी ठीक हैं शादी के बाद तेरी देह कि आग तो बुझ जाएगी जल्दी जल्दी बच्चे हो जाएगे और तूं हमेशा हमेशा के लिये पति बच्चों के बीच पिस कर अपने आप को भूल जाएगी ऐसा में नही चाहती मेरी बच्ची तुझे तो पता है की तेरे माता पिता दोनों शिझक हे उनका समाज में कितना आदर है क्या तू उन्हें नीचा दिखाना चाहेगी उनके लाढ प्यार समझाने से सुरभि रोने लगी थी दादी जी सुरभि के शिर को गोद में रख कर प्यार से थपकियां दे रहीं थी साथ ही में चाहती हूं कि मेरी बेटी पुलिस विभाग में बढी अफसर बने व मेरी बेटी जिससे भी व्याह करे वह कलेक्टर के पद पर आसीन हो दादी जी कि सीख ने उसका जीवन सभा़र दिया था ।

सीख हमें अपने घर परिवार के बूढौ के नजदीक रहकर उनसे बात चीत करना चाहिए ।

 

 

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