ओ गुलाब तुम रह गये कि में तुम्हें छोड़ आया यहां बहुत खोजा तुम्हें पर तुम नहीं मिले तो बहुत पछताया । मैंने सोचा चलो तुम्हारे अन्य साथियों से मिल कर बात करूं फूल तुम किसी दूसरे फूल से तुम्हारी शिकायत करूं पर यहां न गैंदा न चमेली न जुटी कोइ भी नजर नहीं आएं तब तुम्हारे अभाव में हम थे घबड़ाया हम चारों तरफ भटक आएं सरोवर तक गये पर सरोज भी न नजर आएं जंगल भी भटके पर तुम्हारे जैसा कोई नजर नहीं आया तब मेरी पसंद सुन मेरा दोस्त भी मुस्कुराता हुआ बोला कि गुलाब को तुम इस इलाके में खिलाओगे वे शर्म के प्रेमियों को क्या जीते जी जलाओगे मेने कहा था वह भी कोई फूल हैं दोस्त बोला तुम नहीं मानो पर इस इलाके के लिए वही अनुकूल है । मेने कहा क्यों जरा स्पष्ट बताओगे दोस्त बोला बगैर गमला बगैर पानी दिए बगैर रखाए बेसरम चाहे जहां उगाओ पर मैंने कहां पर बेसरम का फूल पूजा में शामिल नहीं होता दोस्त बोला न जाएं ...
अपनी सी कहानियां का पिटारा