सुना है कि नर्क भी होता है । जहां आत्मा को कष्ट भोगना पड़ता है। सारे जीवन का लेखा-जोखा देवदूत आत्मा के सामने रखते हैं फिर न्यायालय जहां उनके भी न्यायमूर्ति न्याय के लिए आत्मा से सवाल जवाब करते हैं । चूंकि सुना है कि वहां पर काले कोट का वकील नहीं होता जो वहस कर , दंड से मुक्त करा दें या फिर किसी न्यायालय के न्यायाधीश को कुछ रकम या धन क्लर्क के माध्यम से पहुंचा दें ? चूंकि यह व्यवस्था वहां नहीं है । इसलिए आत्मा को ही परमात्मा से सवाल जवाब करने पड़ते हैं । जैसे कि सारे जीवन क्या किया मानव मूल्य का कितना पालन किया ? माता पिता, बुजुर्ग,कि सेवा कि या नही ? परिवार के प्रति वफादार रहें कि नहीं । तुम पति-पत्नी बन गये थे समाज ने तुम्हरा व्याह कराया था फिर क्यों संभोग सुख के लिए पर पुरुष पर नारी का उपयोग किया ! जल का कैसा उपयोग किया जमीं के लिए कितना छूठ बोला वनस्पतियों की इज्जत कि उन्हें पानी दिया कि नही ? खुद के सुख के लिए या व्यापार के लिए कितने पेड़ पोंधे क...
अपनी सी कहानियां का पिटारा